रतनपुर

रतनपुर के संरक्षित गज किला में जेसीबी से खुदाई…नियमों की खुली अवहेलना, ठेकेदार की मनमानी पर उठे सवाल

जुगनू तंबोली

बिलासपुर – रतनपुर के प्रसिद्ध गज किला, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है, वहां रविवार को जेसीबी मशीन से खुदाई किए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, किला परिसर के भीतर भारी मशीनों से खुदाई का कार्य खुलेआम किया जा रहा था, जबकि इस संबंध में कोई स्पष्ट सूचना या अनुमति का विवरण प्रदर्शित नहीं किया गया था।

स्थल पर लगे सूचना बोर्ड के अनुसार, यह स्मारक “प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल व अवशेष अधिनियम 1958 (संशोधित 2010)” के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित क्षेत्र है। नियमों के तहत स्मारक के 100 मीटर के दायरे को पूर्णतः प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है, जहां किसी भी प्रकार का निर्माण, खुदाई या परिवर्तन कार्य पूर्णतः वर्जित है। इसके अतिरिक्त 200 मीटर तक का क्षेत्र विनियमित क्षेत्र माना जाता है, जहां किसी भी कार्य के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

इसके बावजूद गज किला के भीतर जेसीबी से खुदाई किए जाने की घटना ने लोगों को चौंका दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि किला परिसर के अंदर गतिविधियां देखी गईं, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन प्रतीत होती हैं। स्थानीय नागरिकों ने मौके पर मौजूद लोगों से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन ठेकेदार या संबंधित पक्ष द्वारा कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, किला परिसर में किसी संभावित निर्माण कार्य की तैयारी की जा रही है, लेकिन यह निर्माण किस उद्देश्य से किया जा रहा है और क्या इसके लिए ASI या अन्य सक्षम प्राधिकरण से अनुमति ली गई है, इस पर पूरी तरह से पर्दा बना हुआ है। नियमों के अनुसार, बिना अनुमति इस प्रकार की गतिविधियां न केवल अवैध हैं, बल्कि दंडनीय अपराध भी हैं, जिसके तहत दो वर्ष तक का कारावास या एक लाख रुपये तक का जुर्माना, अथवा दोनों हो सकते हैं।

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि संरक्षित स्मारकों के साथ इस तरह की लापरवाही बरती जाएगी, तो ऐतिहासिक धरोहरों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। लोगों ने प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से तत्काल हस्तक्षेप कर मामले की जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

यह पूरा मामला न केवल ठेकेदार की संभावित मनमानी को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि संरक्षित स्थलों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर चूक हो रही है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और क्या इस तरह की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकेगी।

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