
उदय सिंह
बिलासपुर – सेवा सहकारी समिति मर्यादित बहतरा में सामने आए फर्जी धान खरीदी घोटाले में अब तक एफआईआर दर्ज न होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उप आयुक्त सहकारिता कार्यालय द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बावजूद मामले में पुलिस कार्रवाई नहीं होना पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बना रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच दल की रिपोर्ट में कंप्यूटर ऑपरेटर नरेंद्र कुमार पटेल द्वारा धान खरीदी में फर्जी एंट्री कर बड़ी राशि के गबन का खुलासा हुआ था।

रिपोर्ट के मुताबिक वास्तविक खरीदी 40135 क्विंटल दर्ज थी, जबकि बाद में फर्जी तरीके से इसे बढ़ाकर 40454 क्विंटल कर दिया गया। इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया कि किसानों के नाम पर फर्जी एंट्री कर राशि को अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लिया गया। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता को देखते हुए उप आयुक्त सहकारिता ने संबंधित अधिकारी को आरोपी को पद से पृथक करने, फर्जी एंट्री की राशि की वसूली करने तथा तत्काल थाना में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।

आदेश 9 अप्रैल 2026 को जारी हुआ, लेकिन अब तक न तो प्राथमिकी दर्ज हुई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई है। मामले में देरी से आम लोगों और किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब स्पष्ट जांच रिपोर्ट और आदेश मौजूद हैं, तो फिर कार्रवाई में इतनी सुस्ती क्यों बरती जा रही है?

क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के इशारे पर बचाने की कोशिश की जा रही है? यदि जल्द ही एफआईआर दर्ज नहीं होती, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है। अब सबकी नजर प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है।