
रमेश राजपूत
बिलासपुर – जिले के घुटकू गांव में प्रशासन की बेदखली कार्रवाई से करीब 100 परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उनका कहना है कि जिस आबादी भूमि पर वे रह रहे हैं, वहां उनके परिवार पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से निवास कर रहे हैं और अब उन्हें पटवारी एवं राजस्व विभाग की ओर से जमीन खाली करने के लिए नोटिस दिया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। यदि मकान तोड़े गए तो सैकड़ों लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो जाएंगे।

ज्ञापन में उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई से परिवारों को मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें न्याय दिलाए।ग्रामीणों ने एक गंभीर सवाल भी उठाया है। उनका कहना है कि जिन मकानों को तोड़ने की बात कही जा रही है, उनमें से कई मकान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए हैं। ऐसे में यदि सरकार ने स्वयं इन आवासों के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए हैं, तो अब उन्हीं मकानों को तोड़ने की नौबत आना कई सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने इसे योजनाओं के क्रियान्वयन और राजस्व रिकॉर्ड के बीच समन्वय की कमी बताया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और वर्षों से निवासरत परिवारों के पुनर्वास अथवा वैधानिक समाधान के बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।