छत्तीसगढ़

मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव का निधन कई बड़े प्रोजेक्ट पर कर रहे थे काम

मोतीमपुर अनुरागी धाम की स्थापना के पीछे इन्हीं की थी महत्वपूर्ण भूमिका बिलासपुर को जल संकट से उबारने लगातार थे प्रयासरत

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

हसदेव कछार जल संसाधन विभाग बिलासपुर के मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव का हृदय गति रुक जाने से 25 जनवरी की रात निधन हो गया । वे 58 वर्ष के थे ।रात करीब12 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा ।इसके बाद उन्हें श्री राम अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि उनके परिवार में उनके बड़े बेटे आईआरएस मयंक श्रीवास्तव का विवाह कार्यक्रम चल रहा था ।वधू पक्ष के लोग गणेश वाटिका में ठहराया गए थे और शुक्रवार को तेल हल्दी का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ था ।इसी रविवार को बेटे की बारात निकलने वाली थी ,लेकिन होनी को शायद कुछ और ही मंजूर था। एसडीओ के रूप में सक्ति , बेलगहना में अपने काम की छाप छोड़ने वाले विजय श्रीवास्तव कोटा और बिलासपुर क्षेत्र में जल संसाधन विभाग के उन प्रमुख अधिकारियों में से थे जिन्होंने बड़ी योजनाओं पर काम किया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 50 साल से बंद पड़ी अरपा भैसाझार परियोजना को अपनी सूझबूझ से डुबान क्षेत्र कम करते हुए पुनः आरंभ करना रहा ।उन्हीं की वजह से मृतप्रायः अरपा भैसाझार परियोजना वर्तमान रूप में सामने आई। बिलासपुर में लगातार जल संकट गहराता जा रहा है । अरपा नदी में वर्षभर जलस्तर बना रहे इसके लिए छपरा टोला खोंगसरा में एक बांध का निर्माण प्रस्तावित है जिसे इस वार्षिक बजट में शामिल करने पर वे काम कर रहे थे । इस परियोजना के पूरा होने के बाद अरपा नदी में पानी का संकट खत्म हो जाएगा ।अरपा नदी और हसदेव नदी को जोड़ने की परियोजना पर भी विजय श्रीवास्तव लगातार काम कर रहे थे ।जाहिर है उनके आकस्मिक निधन से इन दोनों बड़ी परियोजनाओं में रुकावट पैदा होगी ।जल संसाधन विभाग में अपनी गहरी पकड़ और छाप रखने वाले विजय श्रीवास्तव बेहद सहज, सरल और मिलनसार छवि के अधिकारी थे ।उनकी पहचान वीरान पड़े मोतीमपुर में अनुरागी धाम की स्थापना से भी है । वे अनुरागी बाबा के बेहद करीबी शिष्य थे और बाबा के निर्वाण के बाद उन्होंने मोतीमपुर में उनकी समाधि की स्थापना की थी। साथ ही एक बेहद खूबसूरत पुष्प वाटिका का भी उन्होंने सृजन किया था। हर वर्ष 7 जनवरी को यहां विशाल मेले का भी आयोजन उन्हीं के प्रयास से होता रहा है ।साल 2007 से लेकर अब तक जारी इस आयोजन में इस वर्ष मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल हुए थे ।उनके आकस्मिक निधन से केवल उनके करीबी और जल संसाधन विभाग के अधिकारी ही स्तब्ध नहीं है बल्कि मोतीमपुर में अनुरागी धाम से जुड़ा हर व्यक्ति शोकाकुल है ।

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