
भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक बिलासपुर के सिम्स (छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान) में नर्सिंग स्टाफ ने हड़ताल शुरू कर दिया है। नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन के बैनर तले नर्सिंग ऑफिसर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल शुरू कर दी है। सोमवार को दो घंटे का अवकाश लेकर नर्सें हॉस्पिटल परिसर में धरने पर बैठ गईं, जिससे वार्डों में मरीजों की देखभाल प्रभावित हुई। तीन दिवसीय चलने वाले इस हड़ताल में नर्सो ने शासन प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जहा उन्होंने बताया कि वर्तमान में नर्सिंग ऑफिसर्स को 2800 ग्रेड पे दिया जा रहा है। जबकि इसी योग्यता पर अन्य राज्यों और केंद्र में 4800 ग्रेड पे दिया जाता है।

नर्सों का कहना है कि वे पिछले 8 से 10 वर्षों से इस मांग को लेकर आंदोलन कर रही हैं। ज्ञापन, रैली, धरना, यहां तक कि जेल भरो आंदोलन तक किया, लेकिन सरकार ने सिर्फ आश्वासन दिया। जिसे अब तक पूरा नहीं किया गया। इसके साथ ही नर्सों की दूसरी सबसे बड़ी मांग नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की है। एसोसिएशन का दावा है कि सिम्स में 2016 के बाद से एक भी नियमित भर्ती नहीं हुई है। इसके बाद जितनी भी नियुक्तियां हुई हैं, वे सभी ठेका, प्लेसमेंट या अस्थायी आधार पर हुई हैं। नर्सों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि चार साल की कठिन बीएससी नर्सिंग डिग्री और कड़ी ट्रेनिंग के बाद उन्हें महज 10 से 12 हजार रुपये महीने पर काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह उनकी योग्यता और पेशे दोनों के साथ अन्याय है। ठेका प्रथा के कारण न भविष्य सुरक्षित है, न सम्मान। अब देखना यह होगा कि इस आंदोलन से प्रशासनिक स्तर और राज्य सरकार को कितना प्रभाव पड़ता है।
तीन दिन बाद अनिश्चितकालीन की चेतावनी

नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यह सांकेतिक हड़ताल तीन दिन की है। इस दौरान इमरजेंसी सेवाओं को बाधित नहीं किया जाएगा, लेकिन ओपीडी और वार्ड की नियमित सेवाएं प्रभावित रहेंगी। एसोसिएशन ने शासन को चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर उनकी मांगों पर लिखित और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।