
उदय सिंह
बिलासपुर – न्यायधानी बिलासपुर के पुराने बस स्टैंड स्थित सरकारी शराब दुकान के आसपास कथित अवैध चखना दुकानों का संचालन चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर करीब 5 से 7 दुकानों के खुलेआम संचालित होने की बात सामने आ रही है। सवाल यह है कि शहर के बीचों-बीच यदि इतनी दुकानें संचालित हो रही हैं, तो संबंधित विभाग की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या इन दुकानों के संचालन की जानकारी आबकारी विभाग को नहीं है, या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर अनदेखी कर रहे हैं?
पहले हो चुकी है हत्या, फिर भी नहीं चेते जिम्मेदार?
पुराने बस स्टैंड स्थित शराब दुकान का इलाका पहले भी शराब को लेकर हुए विवाद के कारण सुर्खियों में रह चुका है। बताया जाता है कि कुछ साल पहले इसी शराब दुकान के पास हुए विवाद में एक युवक की हत्या हो गई थी। ऐसी घटना के बावजूद शराब दुकान के आसपास की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी और कथित अवैध दुकानों के संचालन पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शराब दुकानों के आसपास चखना दुकानों का संचालन केवल नियमों के पालन का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से भी जुड़ा है। ऐसे में इन दुकानों की वैधता की जांच और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई जरूरी मानी जा रही है।
गांवों में कार्रवाई, शहर में क्यों चुप्पी?
आबकारी विभाग की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एक ओर गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में कार्रवाई की खबरें सामने आती हैं, वहीं शहर के व्यस्त इलाके में कथित अवैध चखना दुकानों के संचालन को लेकर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। आखिर विभाग की निगरानी व्यवस्था यहां कितनी सक्रिय है? आबकारी अधिकारी ऐश्वर्या मिंज से सवाल है कि पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में संचालित बताई जा रही इन दुकानों की जांच कब होगी? क्या विभाग मौके पर पहुंचकर दुकानों की वैधता, संचालन की अनुमति और नियमों के पालन की पड़ताल करेगा? अब निगाहें आबकारी विभाग पर हैं। जरूरत निष्पक्ष जांच की है, ताकि यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो नियमानुसार कार्रवाई हो और शहर के बीचों-बीच व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।