
हरिशंकर पांडेय
मल्हार – आस्था, परंपरा और उल्लास की पावन धरती धर्मनगरी मल्हार में विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास, श्रद्धाभक्ति और धूमधाम के साथ मनाया गया। असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक इस पर्व पर पूरा नगर उत्सवी रंग में रंगा नजर आया। जमकर हुई आतिशबाजी और रावण दहन के रोमांचक दृश्य ने पर्व की भव्यता में चार चांद लगा दिए।

इस बार नगर पंचायत के युवा जनप्रतिनिधियों ने दशहरा आयोजन को लेकर एकजुटता का परिचय दिया, जिससे आयोजन में विशेष उत्साह देखने को मिला। पार्षदो ने मांदर कर्मा दल के धुन में खूब थिरके व जय श्रीराम के जयकारा लगाते स्थल पहुँचे।
बग्गी में सवार होकर मेला चौक पहुंचे श्रीराम-लक्ष्मण….

विजयादशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की भव्य जोड़ी बग्गी में सवार होकर स्कूल चौक से रवाना हुई। श्रद्धा और उत्साह के बीच यह सवारी नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रावण दहन स्थल मेला चौक पहुंची। यहां श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का प्रतीकात्मक मंचन किया गया। इसके पश्चात विधि-विधान और परंपरा के अनुरूप नगर पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व पार्षदो ने राम लक्ष्मण की जोड़ी का पूजन किया जिसके बाद रावण के पुतले का दहन किया गया। रावण दहन होते ही आतिशबाजी से आसमान जगमगा उठा और उपस्थित जनसमूह ने उत्साह के साथ पर्व का आनंद लिया।
हजारों लोग बने ऐतिहासिक पल के साक्षी…..

धर्मनगरी मल्हार के इस भव्य आयोजन को देखने के लिए नगर सहित आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग पहुंचे। मेला चौक में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। पूरा वातावरण उत्साह, उमंग और धार्मिक आस्था से सराबोर रहा। विजयादशमी के इस आयोजन ने लोगों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और सत्य की विजय के शाश्वत संदेश से जोड़ दिया।
भगवान पातालेश्वर को सोन पत्र अर्पित कर दी शुभकामनाएं…..

रावण दहन के बाद मल्हार की परंपरा के अनुसार श्रद्धालुओं ने भगवान पातालेश्वर के मंदिर में पहुंचकर श्रद्धापूर्वक सोन पत्र अर्पित किया। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर विजयादशमी की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे के संदेश के साथ धर्मनगरी मल्हार में विजयादशमी का पर्व श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक गरिमा के बीच संपन्न हुआ।