राष्ट्रीय

राम मंदिर पर मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक, सुको से कहा- बिना विवाद वाली 67 एकड़ जमीन लौटाई जाए

राम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष राम विलास वेदांती ने सरकार के कदम पर खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि यह सरकार का स्वागत योग्य कदम है.

2019 लोकसभा चुनाव से पहले अयोध्या के विवादित राम मंदिर-बाबरी मस्जिद को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा है कि विवादित जमीन छोड़कर बाकी बची जमीन मालिकों को वापस लौटाई जाए. केंद्र ने कहा है कि 67 एकड़ जमीन गैर विवादित है और इसे राम जन्मभूमि न्यास को लाटौई जाए. बाकी के बचे 0.313 एकड़ जमीन जो विवादित है इसपर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करे.

केंद्र सरकार का कहना है कि वह गैर विवादित जमीन मूल मालिकों को लौटाना चाहती है. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से यथास्थिति रखने का आदेश वापस लेने की मांग की है. गैरविवादित जमीन में से ज्यादातर जमीन रामजन्मभूमि न्यास की है. ऐसी संभावना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट केंद्र की मांग पर हामी भर देती है तो राम मंदिर का निर्माण शुरू हो सकता है. आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह मोदी सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है. राम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष राम विलास वेदांती ने सरकार के इस कदम पर खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि यह सरकार का स्वागत योग्य कदम है.

अयोध्या में जमीन विवाद बरसों से चला आ रहा है, अयोध्या विवाद हिंदू मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव का बड़ा मुद्दा रहा है. अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर होने की मान्यता है. हिन्दुओ की आस्था है कि विवादित जमीन पर ही भगवान राम का जन्म हुआ था . हिंदुओं का दावा है कि राम मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई. 1530 में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मंदिर गिराकर मस्जिद बनवाई थी. 90 के दशक में राम मंदिर के मुद्दे पर देश का राजनीतिक माहौल गर्मा गया था. अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को कार सेवकों ने विवादित ढांचा गिरा दिया था.

जिसके बाद मामला आगे और न बढ़े इसके लिए तब की नरसिम्हा राव सरकार ने आसपास की पूरी जमीन को अधिग्रहित कर लिया था. तब से जमीन पर किसी भी तरह के निर्माण पर रोक है. अब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि इस जमीन को लौटा दी जाए.

ध्यान रहे कि राम मंदिर का मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में है. हालांकि एक जज की अनुपस्थिति की वजह से मामला अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया गया है. दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीन हिस्सों में 2.77 एकड़ जमीन बांटी थी.

राम मूर्ति वाला पहला हिस्सा राम लला विराजमान को मिला, राम चबूतरा और सीता रसोई वाला दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को मिला. जमीन का तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का फैसला सुनाया गया. सुप्रीम कोर्ट ने जमीन बांटने के फैसले पर रोक लगाई थी. अयोध्या में विवादित जमीन पर अभी राम लला की मूर्ति विराजमान है.

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