डेस्क

भारतीय समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का संबंध नहीं, बल्कि दो परिवारों का भी संबंध होता है, इसलिए छोटी-छोटी गलतफहमी और आपसी नासमझी से सिर्फ दो लोगों के बीच संबंध नहीं टूटते बल्कि इससे 2 परिवार बिखर जाता है। गलतफहमियां, मनमुटाव का रूप ले लेती है और देखते ही देखते परिवार टूट जाता है। जिससे सबसे अधिक दुष्प्रभाव पति पत्नी के साथ संतान पर तो पड़ता ही है, समाज पर भी इसका विपरीत असर पड़ता है। यही वजह है कि संवेदना और रक्षा टीम महिला सुरक्षा के अलावा परिवार के बिखरने से रोकने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं ।महिलाओं को संबल प्रदान करने का मतलब हमेशा आक्रामक होना नहीं है, बल्कि सुलह नामा कर परिवार को बचाने की भी कोशिश रक्षा टीम कर रही है । रक्षा टीम की बड़ी सफलता तीन अलग-अलग मामलों में नजर आई। जहां महिलाओं ने अपने पतियों के खिलाफ शिकायत की थी लेकिन रक्षा टीम और संवेदना की समझाइश की वजह से झगड़े शांत हुए और रूठी पत्नी वापस पति के साथ रहने चली गई।

ऐसा ही एक मामला सरवन निवासी गीता श्यामल ने अपने पति प्रभात श्यामल के खिलाफ दर्ज कराई थी। रतनपुर में रहने वाली लक्ष्मी पटेल ने भी अपने पति लच्छू पटेल के खिलाफ ऐसी ही कुछ शिकायत दर्ज की थी। रतनपुर की रहने वाली प्रीति यादव भी अपने पति पुष्पराज यादव के साथ नहीं रहना चाहती थी, लेकिन महिला रक्षा टीम ने इन सभी मामलों में मध्यस्था करते हुए गलतफहमियां दूर कराई और इसी वजह से आपसी समझ मजबूत हुई। दोनों पक्षों ने अपनी कमियों और गलतियों को समझा और एक बार फिर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने का संकल्प लिया। महिला रक्षा टीम और संवेदना की वजह से 3 परिवार टूटने और बिखरने से बच गए।
