कोरबा

वन विभाग की नाकामी, दलदल में फंसी मादा हाथी जिंदा नही निकल पाई, एक सप्ताह में दूसरे हाथी की मौत….वन विभाग मौन

डेस्क

कोरबा-वन विभाग के अमले की नाकामी से शुक्रवार को एक और वन्य जीव की जान चली गई, कहने को तो हम 21 वी सदी में जी रहे है और हर अत्याधुनिक संसाधन हमारी मुट्ठी में है। बावजूद इसके 36 घंटो से अधिक समय से दलदल में फंसे हाथी को नही बचाया जा सका। इस दुःखद घटना ने क्षेत्र के वन्यप्राणियों की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए है, तो वही वन विभाग में कुर्सी तोड़ने वाले अमले के कार्य की वास्तविक स्थिति भी साफ हो गई है। आपको बता दे यह पूरा मामला केन्दई वन परीक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कुल्हरिया का है। जहाँ मंगलवार को एक हाथी दलदल नुमा खेत मे जा फंसा था।

जहाँ चार दिनों से दलदल में फंसे हाथी को बचाने की कवायद अंतत: विफल हो गई। इस बीच वन विभाग के अमले ने हाथी की मौत की पुष्टि की है और दलदल से हाथी का शव भी बाहर निकाल लिया गया है। दलदल में फंसे हाथी को पिछले कई घंटों से बाहर निकालने की कवायद चल रही थी। वन विभाग के कर्मचारी और ग्रामीण दलदल के कीचड़ को हटाने, हाथी के सामने पीपल और तेंदू आदि के डंगाल फेंककर मदद करने की कोशिश कर रहे थे। कीचड़ और दलदल की वजह से जेसीबी भी मौके तक नहीं पहुंच पायी, इसलिए हाथ से ही कीचड़ हटाने के काम मे वन कर्मी जुट गए । क्षेत्र के ग्रामीण भी इसमें मदद कर रहे थे। चार दिनों से दलदल में फंसे रहने से हाथी की हालत निरंतर बिगड़ती गई और अंतत: शुक्रवार को दोपहर में हाथी ने दम तोड़ दिया।

योजना विहीन कार्य से गई गजराज की जान..

वन भूमि तथा वन्यप्राणियों की रक्षा की जिम्मेवारी वन विभाग की है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों से निपटने वन विभाग के पास ना तो कोई प्रभावशील योजना है और ना ही संसाधन, शायद यही वजह है कि कई ऐसे गंभीर मामलों की जानकारी सभी को नही मिल पाती, साथ ही इसी कारण लगातार वन्य प्राणियों और वन धरोहर की साख कमजोर होती जा रही है। मंगलवार को केन्दई वन परीक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कुल्हरिया में हाथी के दलदल में फसने के दौरान मौत होने की यही वजह रही है यह हम नही क्षेत्र की जनता कह रही है।

डॉक्टरों की टीम भी उपलब्ध नही थी..

हाथी के दलदल में फंसे होने की सूचना के बाद भी मौके पर डॉक्टरों की टीम नही पहुँची। वन विभाग के ओहदेदारों को भी इस घटना की जानकारी थी इसके बाद भी वन विभाग के पास पर्याप्त समय था। शायद मामले में डॉक्टरों से राय ली जाती तो आज गजराज की जान बच सकती थी।

क्या इस प्रकरण में प्रशासन होगा गंभीर?

जिस तरह 36 घंटे के बाद भी दलदल में फंसे हाथी को रेस्क्यू ऑपरेशन से नही बचाया जा सका। इस गंभीर मामले में अब तक जिला प्रशासन ने कोई उचित जांच के निर्देश नही दिए है, ऐसे में सभी की उम्मीद जिला प्रशासन और वन मंत्री के ऊपर टिकी हुई है।

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