छत्तीसगढ़बिलासपुर

एक और पत्रकार के खिलाफ षड्यंत्र पूर्वक किया जा रहा झूठा मामला तैयार, आई जी को ज्ञापन सौंपकर बिलासपुर प्रेस क्लब ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

केवल संदेह के आधार पर प्रतिशोध में कार्यवाही करते हुए एक पत्रकार के खिलाफ झूठा और मंत्र मनगढ़ंत आरोप लगाकर उसके सार्वजनिक छवि को खराब किया जा रहा है

बिलासपुर,सत्याग्रह

बुधवार को पत्रकार बिरादरी के लिए दो महत्वपूर्ण खबरे आई । रायपुर के पत्रकार सुमन पांडे पर हुए हमले के आरोपी भाजपा जिला अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने ना सिर्फ पत्रकारों से माफी मांगी बल्कि तीन और अन्य आरोपियों को निलंबित करने का वायदा किया, लेकिन बिलासपुर और मुंगेली के एक और पत्रकार को झूठे मामले में फंसाने की शिकायत बुधवार को ही बिलासपुर प्रेस क्लब द्वारा आईजी से की गई। पत्रकार आकाश दत्त मिश्रा ने 31 जनवरी को सत्याग्रह डॉट इन के लिए एक खबर लिखी थी जिसमें उन्होंने मुंगेली रक्षा टीम के सदस्यों की कार्यशैली और आचरण पर कई गंभीर सवाल उठाए थे ,उन्होंने इस खबर में एक वीडियो का भी जिक्र किया था जो इन दिनों वायरल हो रहा है । जिसमें रक्षा टीम की सदस्य दो महिला आरक्षकों को एक पुरुष आरक्षक के साथ रक्षा टीम कार्यालय में ही फिल्मी गाने पर थिरकते दिखाया गया था। शायद इस खबर को मुंगेली रक्षा टीम ने व्यक्तिगत आक्षेप मान लिया और कहा जा रहा है कि इसी के प्रतिशोध में षड्यंत्र रचते हुए आकाश के खिलाफ झूठा , मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगा दिया गया। दोनों महिला आरक्षको ने मुंगेली एसपी और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए आकाश मिश्रा द्वारा उन्हें लंबे वक्त से परेशान करने, छेड़छाड़ करने ,यहां तक कि ब्लैकमेल करने तक का गंभीर आरोप लगाया है। हैरानी इस बात की है कि जिस रक्षा टीम की जिम्मेदारी यह है कि जब भी कोई महिला या युवती ऐसी ही किसी विपरीत परिस्थितियों से गुजरे तो रक्षा टीम के सदस्य उनकी मदद के लिए आगे आए और उन्हें कानूनी मदद उपलब्ध कराएं । खुद रक्षा टीम में होने के बावजूद इन महिला आरक्षको ने जिस तरह से शिकायत करने के लिए महीनों इंतजार किया, वह और शिकायत की टाइमिंग संदेह उत्पन्न करती है , क्योंकि खबर 31 जनवरी को प्रकाशित हुई और 3 फरवरी को ही दोनों महिला आरक्षको ने लगभग

एक जैसी शिकायत दर्ज कराई

इसे दुर्भावना पूर्वक की गयी शिकायत बताया जा रहा है।दरअसल पूरे घटनाक्रम का लब्बो लुआब यही है कि पत्रकार पुलिस के खिलाफ कोई खबर ना लिखें।इसलिए कार्यवाही का डर दिखाकर कलम की धार को कुंद किया जाये।
राजनीतिक दल हो या फिर पुलिस्- प्रशासन। सभी मीडिया पर शिकंजा तंग करते हुए यही प्रयास कर रहे हैं कि पत्रकार खबरें उनके मन मुताबिक ही लिखे। जब भी लिखे उनकी तारीफ में कसीदे पढ़े जाये। विरोध की हर आवाज को कुचलने की साजिश रची जा रही है । इस झूठे और बेबुनियाद मामले में पत्रकार आकाश मिश्रा के खिलाफ जांच समिति गठित की गई है और उन्हें बार-बार थाने बुलाकर परेशान किया जा रहा है। मुंगेली पुलिस की कार्यशैली संदिग्ध और पक्षपात पूर्ण नजर आने पर बुधवार को बिलासपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष तिलक राज सलूजा के साथ आकाश मिश्रा और अन्य वरिष्ठ पत्रकारों ने आईजी प्रदीप गुप्ता से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराई और इस मामले में मुंगेली से बाहर के किसी अन्य पुलिस अधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। आईजी ने पत्रकारों के निवेदन पर गंभीरता से कार्यवाही करने का भरोसा दिया है।

क्या है उस वीडियो में

दरअसल पूरे मामले के पीछे जिस वायरल वीडियो का जिक्र किया जा रहा है उसके पीछे की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है । दो महिला आरक्षकों ने अपनी सहेली का बर्थडे मनाते हुए मुंगेली रक्षा टीम कार्यालय में फिल्मी गाने पर डांस किया था और उनके ही एक साथी ने अपने मोबाइल पर उसका वीडियो बनाकर फेसबुक पर अपलोड कर दिया था । फेसबुक से यह वीडियो कई लोगों तक पहुंच गया। जिसके बाद एक पोर्टल ने भी वीडियो के साथ घटना की खबर प्रकाशित की थी। यानी वीडियो के सार्वजनिक होने के करीब महीने भर बाद भी अगर महिला आरक्षक यह कहती है कि आकाश मिश्रा उस वीडियो का डर दिखाकर उन्हें ब्लैकमेल कर रहा है तो यह बात हास्यास्पद लगती है। आकाश दत्त मिश्रा का कहना है कि महिला आरक्षकों के साथ मुंगेली पुलिस अधिकारियों को भी यही लगता है कि वह वीडियो आकाश मिश्रा ने हीं वायरल किया है जबकि बताया जा रहा है कि यह वीडियो खुद उस आरक्षक ने अपने फेसबुक आईडी में डाला था जो खुद वीडियो में डांस करता नजर आ रहा है। केवल संदेह के आधार पर प्रतिशोध में कार्यवाही करते हुए एक पत्रकार के खिलाफ झूठा और मंत्र मनगढ़ंत आरोप लगाकर उसके सार्वजनिक छवि को खराब किया जा रहा है साथ ही पत्रकारों के मन में भी इस तरह का भय उत्पन्न किया जा रहा है ताकि वे भी भविष्य में कभी पुलिस के खिलाफ रिपोर्टिंग करने के दौरान सौ बार सोचे। बिलासपुर प्रेस क्लब के पत्रकारों ने इसीलिए आई जी प्रदीप गुप्ता से मुलाकात कर मामले में निष्पक्ष जांच और जांच होने तक आकाश को गिरफ्तारी ना करने की मांग की है।यानि पत्रकार अधिकार की एक लड़ाई खत्म हुई नहीं और दूसरे की रूपरेखा बनने लगी है । राज्य शासन पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की बात बार-बार करती है अब ऐसा करना बेहद जरूरी हो गया है ताकि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ निर्भीक और निष्पक्ष होकर जनता को सच्चाई से रूबरू करा सके

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