
भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर – सिम्स कोरोना ओपीडी में इलाज कराने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में युवक के मौत के मामले में कोरोना रिपोर्ट ने सभी संदेहों को निराधार साबित कर दिया है। दरअसल रिंग रोड दो निवासी बेनीराम बावरी पिछले एक साल से साँस संबंधित समस्या से जूझ रहा था। जिसकी अचानक 17 अप्रैल को तबीयत बिगड़ी जिसे परिजनों ने कोरोना ओपीडी में उपचार के लिए ले गए थे। जहाँ डॉक्टरों ने उसे एडमिट होने की सलाह दी थी। लेकिन उन्होंने उनकी बात नही मानते हुए प्राथमिक उपचार के बाद वहां से चले गए। वहीं रात में युवक के परिजन झाड़-फूंक के लिए उसे लुथरा लेकर जा रहे थे, लेकिन हालत बिगड़ने पर रास्ते से ही वापस आ गए।
जब वह युवक को सिम्स लेकर जा रहे थे तभी उसकी मौत हो गई। इस मामले को कोरोना संक्रमण से जोड़ कर देखा जाने लगा। जिसको लेकर ऐहतियात के तौर पर सिम्स प्रबंधन ने मरीज का सैम्पल जांच हेतु भेजा था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। डॉक्टरों का कहना है कि उसकी जांच एवं रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि मरीज के ऊपरी श्वसन नली में एवं गले के भीतर ऊपरी हिस्से में संक्रमण था, मरीज के परिजनों ने बताया कि उसे यह समस्या विगत एक वर्ष से थी।
कोरोना के संदेह में अब तक नही हो सका पोस्टमार्टम..
युवक के अचानक हुए मौत को लेकर सिम्स प्रबंधन को शक था की युवक कोरोना पॉजेटिव हो सकता है शायद इसी लिए युवक की मौत होने के बाद उसका पोस्टमार्टम होने नहीं दिया गया है। वही युवक के शव को सिम्स के फ्रिजर में अलग से रख दिया गया था। प्रबंधन के द्बारा युवक को कोरोना संदेही समझने के कारण उसका दो दिन से पोस्टमार्टम नहीं हो पाया है। जिसके कारण परिजन उसका अंत्येष्टि भी नहीं कर पा रहें है। अब सोमवार को पोस्टमार्टम होने के बाद ही युवक का शव परिजन को सौपा जा सकेगा।