
उदय सिंह
बिलासपुर – एक ओर पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मना रहा है, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित एसईसीएल मुख्यालय के मुख्य गेट के सामने कोरबा-कुसमुंडा क्षेत्र के 17 भू-प्रभावित परिवार भूखे-प्यासे आमरण अनशन पर बैठने को मजबूर हैं। रोजगार की मांग को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अनशन पर बैठे भू-प्रभावितों ने बताया कि कुसमुंडा क्षेत्र में खनन परियोजनाओं के विस्तार के दौरान उनकी कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया था। भूमि जाने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। नियमानुसार प्रत्येक पात्र भू-प्रभावित परिवार को रोजगार देने का प्रावधान है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद अब तक उन्हें नौकरी नहीं दी गई है। भू-प्रभावितों का आरोप है कि इस मामले में एक वर्ष पूर्व माननीय हाईकोर्ट, बिलासपुर द्वारा भी स्पष्ट आदेश जारी किया गया था, जिसमें पीड़ितों की समस्या का शीघ्र समाधान कर उन्हें नियमानुसार रोजगार देने के निर्देश दिए गए थे।

इसके बावजूद एसईसीएल प्रबंधन द्वारा आदेशों का पालन नहीं किया गया और पिछले एक वर्ष से प्रभावितों को कार्यालयों के चक्कर कटवाए जा रहे हैं। बार-बार आवेदन, ज्ञापन और मुलाकात के बाद भी उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। अनशनकारियों ने कहा कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के दिन भी वे अपने अधिकारों के लिए भूखे-प्यासे सड़क पर बैठे हैं, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उनका कहना है कि कुछ मामलों में नियमों को दरकिनार कर बाहरी लोगों को रोजगार दिया गया, जबकि वास्तविक भू-प्रभावित आज भी बेरोजगार हैं। भू-प्रभावितों ने प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन से मांग की है कि हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल पालन करते हुए सभी पात्र परिवारों को शीघ्र रोजगार प्रदान किया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा, चाहे यह अनिश्चित काल तक ही क्यों न चले।
अनशन स्थल पर लगातार लोगों का समर्थन प्रभावितों को मिल रहा है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन की ओर टिकी हैं कि वे कब पीड़ितों की सुध लेते हैं और उन्हें उनका संवैधानिक अधिकार दिलाते हैं।