
उदय सिंह
बिलासपुर – जिले के पचपेड़ी तहसील अंतर्गत ग्राम चिस्दा में शासकीय भूमि पर फर्जी पट्टा बनाकर अवैध नामांतरण और बिना कृषि कार्य किए धान बिक्री टोकन कटवाने का गंभीर मामला सामने आया है। मामले में उक्त जमीन पर काबिज पीड़ित परिवारों ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि खसरा नंबर 43/5, रकबा 1.011 हेक्टेयर शासकीय भूमि पर गांव का ही एक व्यक्ति द्वारा कोटवार, पटवारी एवं सरपंच से मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज कराया गया। शिकायत के अनुसार, उक्त भूमि पर पीड़ित परिवारों के द्वारा पिछले 35–40 वर्षों से शांतिपूर्वक काबिज होकर निवासरत हैं तथा खेती-बाड़ी करते आ रहे हैं। पटवारी प्रतिवेदन में वर्ष 2012 से 2015 तक धान बोना दर्शाया गया, जबकि उसके बाद कोई कृषि कार्य नहीं किया गया। बावजूद इसके, वर्ष 2025–26 में किसान कोड के माध्यम से धान बिक्री का टोकन कटवाया गया, जिसे शासन के साथ धोखाधड़ी बताया गया है।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि 16 दिसंबर 2025 को तहसीलदार पचपेड़ी के समक्ष लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं की गई, उल्टे मिलीभगत कर पुनः धान बेचने की अनुमति दे दी गई। मामले में मौके की जांच पंचनामा, पुराने बी-1 खसरा अभिलेख उपलब्ध है। शिकायत में मांग की गई है कि फर्जी पट्टे व नामांतरण की विस्तृत जांच कर उसे निरस्त किया जाए, खसरा नंबर 43/5 में अवैध रूप से कटवाए गए धान बिक्री टोकन पर कार्रवाई हो तथा दोषियों के विरुद्ध धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया जाए। साथ ही पीड़ित परिवारों को उक्त सरकारी भूमि से बेदखल न किए जाने और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की भी मांग की गई है। मामला उजागर होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल देखी जा रही है।