
भुवनेश्वर बंजारे
बिलासपुर – मांझी अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण हेतु मछुआरा समाज अब प्रदेश भर में आंदोलन की राह पर निकल पड़ा है। संभाग स्तरीय कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को बिलासपुर के कलेक्ट्रेट में छत्तीसगढ़ मछुआरा समाज ने छत्तीसगढ़ मछुवारा संघर्ष मोर्चा के बैनर मछुआरो ने पहुंचकर प्रदर्शन किया, जिसमें संभाग के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संघर्ष मोर्चा को अब मूलवासी आदिवासी निषाद संगठन सहित दो अन्य संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया। प्रदेश संयोजक सुखऊ राम निषाद ने बताया कि मछुआरा समाज को 1950 से ही अनुसूचित जनजाति का लाभ प्राप्त करने की पात्रता है और यह तत्कालीन शासकीय दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेखित है।
मछुआ समाज के द्वारा संविधान में 1950 में भेजी गई अनुशंसा जिसमें माझी (केवट, मल्लाह, धीवर, भोई- कहार, कहरा) स्पष्ट लेख है के बावजूद जनजाति आरक्षण का लाभ नही प्रदान किया जा रहा है। इससे सम्बन्धित समस्त दस्तावेज राज्य की जनजाति विभाग व ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट को उपलब्ध कराने के बाद भी इस विषय पर कोई भी कार्यवाही अब तक नहीं की गई है जिसके कारण समाज के भीतर भयंकर रोष व्याप्त है। राज्य सरकार द्वारा 2023 विधानसभा सत्र में अनुसूचित जनजाति संबंधी संकल्प भी किन्ही कारणों से चर्चा नही आ पाया और यह पारित नहीं होने के कारण पूरे मछुआरा समाज में शासन की कार्यप्रणाली पर घोर निराशा व्याप्त हो रही है। जिसको लेकर संघर्ष मोर्चा ने जिला कलेक्टर सौरभ कुमार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। और मांगे पूरी नहीं होने की स्थिति में राज्य स्तरीय आंदोलन करने की बात कही है।