
जुगनू तंबोली

रतनपुर – भारत में हर साल 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे का उद्देश्य युवाओं को आतंकवाद और हिंसा के रास्ते से दूर करना है, आम लोगों की पीड़ा को उजागर करना और यह दिखाना कि यह कैसे राष्ट्रीय हित के लिए हानिकारक है। वर्ष 1991 में आज ही के दिन भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। इस वर्ष राजीव गांधी की 30वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है। राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस की आधिकारिक घोषणा 21 मई, 1991 को भारत के 7वें प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद की गई थी। वह तमिलनाडु में आतंकवादियों द्वारा मारे गए थे। इसके बाद वी.पी. सिंह सरकार ने 21 मई को आतंकवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इस दिन सभी सरकारी कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों आदि में आतंकवाद विरोधी शपथ ली जाती है। लिट्टे उग्रवादियों ने राजीव गांधी की जान ली थी। श्रीलंका में शांति सेना भेजने से नाराज तमिल विद्रोहियों ने तमिलनाडु के श्रीपेरम्बदूर में राजीव पर आत्मघाती हमला किया। लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहे राजीव गांधी के पास एक महिला फूलों का हार लेकर पहुंची और उनके बहुत करीब जाकर अपने शरीर को बम से उड़ा दिया। धमाका इतना जबरदस्त था कि उसकी चपेट में आने वाले ज्यादातर लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

लिहाज़ा राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस के अवसर पर रतनपुर थाने में भी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने शपथ ली।