रायपुर

24 घंटे में 30 सड़क दुर्घटनाएं, 11 महीनों में 10 हजार से अधिक….वही मौत के आंकड़े 4 हजार के पार…. प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं बनी चिंता की सबब

उदय सिंह

रायपुर – हाईवे पर तेज आवाज में तेज रफ्तार से दौड़ती गाड़ियां अब आधुनिक जीवन का हिस्सा बन गई है। एक तरफ हाईवे पर सबसे बड़ी सहूलियत तो यह है कि इंसान कम वक्त में अपनी मंजिल तय कर लेता है तो दूसरी तरफ ईंधन के बचत की भी है। रफ्तार का नशा ,रफ्तार की आंधी इन हाईवे की सड़कों पर देखने में मिलती है। यहीं रफ्तार ना जाने हर साल कितने लोगों की जान लेता जा रहा है। इन मामलों में महानगर तो है ही लेकिन इस रेस में अब छत्तीसगढ़ भी पीछे नही है। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी मुद्दे पर छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन चर्चा की गई। जहां से जो आकड़े सामने आए है। वह वाकई चौकाने वाले है। सदन में प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने बुधवार को आंकड़े पेश किए है। इस सवाल को सदन में सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा ने किया था। उन्होंने जनवरी 2020 से 30 नवम्बर 2020 तक हुई सड़क दुर्घटनाओं की जानकारी मांगी थी। इसके लिखित उत्तर में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने पिछले 11 महीनों में 4 हजार 17 लोगों के मौत का आंकड़ा दिया। यही नही पिछले 11 महीनों में प्रदेशभर में कुल 10269 सड़क दुर्घटनाएँ हुई है, जिसमें 4017 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है। जबकि इन दुर्घटनाओं में 9409 लोग घायल भी हुए है। हालाकि इन मामलों में गृहमंत्री ने सफाई देते हुए बताया कि पुलिस मुख्यालय द्वारा विभिन्न स्तरों से जांच कर समीक्षा के दौरान यह पता चला कि इन सड़क दुर्घटनाओं की मुख्य वजह तेज रफ्तार, लापरवाही पूर्वक गाड़ी चलाने और यातायात नियमों की अनदेखी को बताया गया है।

सदन में पेश किए गए आंकड़े में रायपुर जिले में ही सिर्फ जनवरी से नवम्बर 2020 तक सड़क दुर्घटना के 1598 मामले दर्ज हुए हैं। इन दुर्घटनाओं में 437 लोगों की जान गई है। वहीं 1186 व्यक्ति घायल हुए हैं। वहीं बिलासपुर, राजनांदगांव, रायगढ़ और दुर्ग जिले से भी चिंताजनक आंकड़े आए हैं।

विधानसभा में पेश आंकड़ों के मुताबिक जनवरी से नवम्बर 2020 की अवधि में बिलासपुर जिले में हुईं 819 दुर्घटनाओं में 264 लोगों की जान गई है। राजनांदगांव जिले में इसी दौरान 699 केस दर्ज हुए हैं। इनमें 253 लोगों की मौत हुई। रायगढ़ में 449 मामलों में 232 लोगों की असमय मौत का मामला इसी दौरान दर्ज हुआ है। महासमुंद जिले में 198 लोगों की मौत रिपोर्ट हुई है। भारतीय राष्ट्रीय राज्यमार्ग प्राधिकरण नेशनल हाईवे पर लगातार सड़क दुर्घटना के बढ़ते ग्राफ से चिंतित है। लिहाजा सड़को में होने वाले दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने हर संभव प्रयास कर रहे है। ऐसे में लोगो को समय रहते जागरूक होना जरूरी है अन्यथा रफ्तार का कहर हमेशा हजारों निर्दोष लोगों को हर साल अपने अगोश में लेता रहेगा।

प्रदेश में महीनों ताले बंदी के बाद भी,,दुर्घटना का ग्राफ चिंतनीय..

छत्तीसगढ़ में कोरोना के कहर से विगत 4 महीनों में आम जनता के आवाजाही पर प्रशासनिक रोक लगाई गई थी। इसके बाद भी छत्तीसगढ़ में सड़क दुर्घटनाओं की भारी बढ़त दर्ज की गई है। आकड़ो की माने तो बीते 11 महीनों में प्रदेश में हर 24 घन्टो में 30 रोड एक्सीडेंट की घटना हुई है। ऐसे में प्रदेश के यातायात व्यवस्था के साथ वाहन चालकों के ड्राइविंग के दौरान संजीदगी पर कई सवाल उठ रहे है। जिसका जवाब ढूंढ कर उसपर अंकुश लगाने युद्धस्तर पर कार्य करने की जरूरत समझी जा रही है।

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