
रमेश राजपूत
बिलासपुर – कोटा क्षेत्र के ग्राम बिल्लीबंद धनुवारपारा की सात वर्षीय रायना बंजारे की सर्पदंश के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल ऑटो से कोटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे थे। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने गंभीर हालत देखते हुए उसे सिम्स बिलासपुर रेफर किया, लेकिन परिजनों के मुताबिक एंबुलेंस मिलने में करीब एक घंटे की देरी हो गई। इसके बाद बच्ची को सिम्स पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के अनुसार रायना मंगलवार रात भोजन के बाद अपनी दादी के साथ खाट पर सोई थी। बुधवार सुबह करीब चार बजे उसने पेट दर्द की शिकायत की। कुछ देर बाद उसे उल्टियां होने लगीं और सांस लेने में परेशानी होने लगी। सर्पदंश की आशंका के बीच परिजन उसे बिना समय गंवाए ऑटो से कोटा अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने तत्काल सिम्स ले जाने की सलाह दी।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल परिसर के बाहर एंबुलेंस दिखाई देने के बावजूद उन्हें रतनपुर से एंबुलेंस बुलाने के लिए कहा गया। एंबुलेंस के इंतजार में करीब एक घंटा बीत गया। गंभीर हालत में जिंदगी और मौत से जूझ रही बच्ची को आखिरकार सिम्स ले जाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। रायना के पिता दीपक बंजारे पुणे में निजी नौकरी करते हैं, जबकि बच्ची अपनी मां और परिवार के साथ गांव में रहती थी। पिता के गुरुवार को सिम्स पहुंचने के बाद मासूम की पोस्टमार्टम के पश्चात शव परिजनों को सौंप दिया गया। वहीं मासूम की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है।परिजनों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती तो बच्ची को जल्द उच्च चिकित्सा केंद्र पहुंचाया जा सकता था। हालांकि, मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण और एंबुलेंस में हुई देरी का उपचार पर कितना प्रभाव पड़ा, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। घटना ने सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आपात स्थिति में एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी यदि मरीज के परिजनों को इंतजार करना पड़े, तो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था कितनी तैयार है।