कोरबाछत्तीसगढ़

आदिवासी जोड़े का विवाह कराने अमेरिका से पहुंचे धर्म पिता

केंदई जलप्रपात के पास भरे इस ग्रामीण मेले का आसपास के लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य

कोरबा जिले के मोरगा गांव स्थित केंदई फॉल के पास मौजूद भजनानंद वनवासी आश्रम में इस वर्ष भी आदिवासी सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया। आयोजन का यह 38 वा साल है। इस वर्ष भी 100 के करीब आवेदन आए थे जिनमें से चयनित 59 वनवासी वर-वधू वैदिक मंत्रोच्चार के बीच परिणय सूत्र में बंधे। भजनानंद आश्रम और स्वामी शारदानंद सरस्वती के सानिध्य में इस बार भी दूर-दूर से यजमान धर्म माता-पिता की भूमिका निभाने पहुंचे, इनमें अमेरिका से पहुंचे संजीव चोपड़ा से लेकर नोएडा के शिवनाथ, बड़ोदरा के रमेश चंद्र जैसे नाम शामिल थे। बेहद निर्धन आदिवासी परिवारों में विवाह योग्य कन्या और बेटों का विवाह केवल धन अभाव के चलते नहीं हो पाता था। लोग विवाह के लिए कर्ज लेते थे और कर्ज चुकाने में पूरी जिंदगी निकल जाती थी। इस समस्या को भांपते हुए 38 साल पहले शारदानंद सरस्वती ने आदिवासी वर वधु के लिए इस सामूहिक विवाह का आयोजन आरम्भ किया। हर वर्ष बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी युवा जोड़ें इस इसमें शामिल होते हैं। यहां विवाह संबंधी सभी जिम्मेदारी वहन करने के साथ नव गृहस्थी में प्रवेश करने वाले जोड़े को साइकल बिस्तर बर्तन और अन्य घरेलू सामग्रियां उपहार में दिए जाते हैं। इनका कन्यादान करने की होड़ मची रहती है और दुनिया भर से चुनिंदा लोग लोगों को यह सौभाग्य मिलता है। यह सिर्फ एक औपचारिकता भर नहीं है बल्कि धर्म माता-पिता और वर वधू का स्थाई संबंध बन जाता है और बरसों बरस यह संबंध कायम रहता है। अवसर पाकर यजमान बेहद भावुक नजर आए।

आदिवासियों की घटती जनसंख्या चिंता का विषय है । विवाह का खर्च भी उठा पाने में सक्षम ना होने से कई बार विवाह में अड़चन की स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन भजनानंद आश्रम द्वारा यह जिम्मेदारी उठाए जाने के बाद स्थानीय युवाओं ईसे लेकर बेहद उत्साहित है। सामूहिक विवाह में शामिल होने वाले जोड़ों की खुशी छुपाए नहीं छुप रही।

सुदूर वनांचल में आयोजित होने वाले इस खास समारोह में शामिल होने अमेरिका से तक लोग पहुंचे हैं, इससे समझा जा सकता है कि ऐसे सर्वहारा वर्ग के लिए कुछ कर, संपन्न वर्ग को किस तरह की आत्मिक संतुष्टि मिल रही है ।

यहां स्थापित रिश्ता स्थाई होता है। 38 सालों में जिन वर वधू का विवाह आश्रम में संपन्न कराया गया है, वह भी बेटियां हैं और मायके में होने वाले आयोजन में वह शामिल होती हैं ।इस बार भी ऐसे ही ना जाने कितने जोड़े इस वार्षिक आयोजन में शामिल होने पहुंचे थे ।59 वनवासी वर वधू को आशीर्वाद के साथ उपहार देकर विदा किया गया। वर वधू के चयन में भी काफी सावधानी बरती जाती है और इसके लिए गांव के सरपंच, पटवारी और बुजुर्गों से पूछताछ के बाद ही पात्रों का चयन किया जाता है । इस वर्ष सभी जोड़ों को वैध प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। इस मौके पर यहां मेला भी भरा। केंदई जलप्रपात के पास भरे इस ग्रामीण मेले का आसपास के लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया।

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