
रमेश राजपूत
जशपुर – छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां अंधविश्वास ने एक बेबस बुजुर्ग महिला की जान ले ली। बगीचा थाना क्षेत्र के ग्राम गीतारी पानी में 71 वर्षीय फुलमइत बाई की कथित तौर पर जादू-टोना के शक में लकड़ी के डंडे से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी छदनु राम 30 वर्ष को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, फुलमइत बाई अपने प्रधानमंत्री आवास में अकेली रहती थीं। पति और बच्चों की पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि वे स्वयं लकवाग्रस्त थीं और ठीक से चल-फिर भी नहीं पाती थीं। गांव में रहने वाले परिजन ही उनका खाना-पीना और देखभाल करते थे। शनिवार सुबह जब परिजन उन्हें खाना देने पहुंचे, तो घर के भीतर उनका शव पड़ा मिला। कंबल हटाकर देखने पर सिर और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान मिले, वहीं पास में लकड़ी का डंडा भी पड़ा था। जांच में सामने आया कि गांव का ही आरोपी छदनु राम अपने परिवार के बार-बार बीमार होने से परेशान था। उसने इस बीमारी के पीछे फुलमइत बाई पर जादू-टोना करने का शक पाल लिया। इसी अंधविश्वास ने उसके भीतर इतनी क्रूरता भर दी कि वह 3 अप्रैल की रात महिला के घर पहुंचा और सोची-समझी साजिश के तहत उन पर लकड़ी के डंडे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। असहाय और वृद्ध महिला मौके पर ही दम तोड़ बैठीं। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत हत्या का अपराध दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की। आरोपी ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। हत्या में प्रयुक्त डंडा भी जब्त कर लिया गया है। यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज के सामने एक कड़वा सवाल है आखिर कब तक अंधविश्वास इंसानी जानें निगलता रहेगा? बीमारी का इलाज डॉक्टर और दवा से होता है, न कि किसी निर्दोष पर जादू-टोना का आरोप लगाकर। जशपुर की यह घटना चेतावनी है कि अंधविश्वास सिर्फ सोच को नहीं, इंसानियत को भी मार देता है।