
दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में शराब की खपत कम होगी लेकिन सच्चाई यही है कि साल दर साल शराब की खपत बढ़ती जा रही है और मदिरा प्रेमियों में नए नाम शुमार हो रहे हैं

बिलासपुर मोहम्मद नासिर
पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने शराबबंदी के वायदे के साथ जीता था। उम्मीद थी कि इस वित्तीय वर्ष से प्रदेश में शराबबंदी लागू कर दी जाएगी। एक वर्ग यह भी कह रहा था कि मुमकिन है इस बार सरकार खुद शराब ना बेचे। लेकिन दोनों ही गलत साबित हुए। ना तो शराब बंदी हुई और ना ही सरकार ने शराब बेचना बंद किया। अलबत्ता इतना जरूर हुआ कि एक अप्रैल से शराब महंगी जरूर हो गई। 1 अप्रैल को जब मदिरा प्रेमी शराब खरीदने, शराब दुकान पहुंचे तो शराब की नई कीमत सुनकर उनके भंवे तन गए। शराब की खपत कम करने के उद्देश्य के साथ आबकारी विभाग ने शराब की कीमतों में बढ़ोतरी की है। देसी शराब, मसाला में निप की कीमत 70, पिंट की 140 और क्वार्टर की 270 कर दी गई है ।वहीं प्लेन निप 60, पिंट 120 और क्वार्टर 230 रुपये कांच और पेट दोनों ही बोतल में तय की गई है। एक तो शराब महंगी हो गई ऊपर से यह शराब, दुकानों में मिल भी नहीं रही है।

बिलासपुर में मंगला और सकरी शराब दुकान को छोड़कर सभी शराब दुकानो में शराब की भारी किल्लत है। और यहां नाराज शराब प्रेमियों की भीड़ देखी जा रही है । देशी शराब के अलावा अंग्रेजी शराब की कीमतों में भी 8 से 20% तक बढ़ोतरी नए वित्तीय वर्ष में की गई है। बियर की कीमत भी यकायक बढ़ गई है । पूरे देश में छत्तीसगढ़और छत्तीसगढ़ में बिलासपुर सर्वाधिक शराब खपत के लिए जाना जाता है।

इसलिए शराब की किल्लत और शराब के महंगे हो जाने से बिलासपुर के मदिरा प्रेमी खासे खफा है और सरकार को कोसते नजर आ रहे हैं। वैसे शराब की लत दस , बीस रुपये की बढ़ोतरी से खत्म होने वाली चीज नहीं है। पूर्ण शराबबंदी ही एकमात्र विकल्प है, लेकिन जिन राज्यों में पूर्ण शराबबंदी की गई है वहां भी यह पाया गया है कि लोग किसी भी तरह से शराब का बंदोबस्त कर लेते हैं और इससे सरकार की जगह अपराधियों की चांदी हो रही है ।खैर, 1 अप्रैल को आबकारी विभाग ने शराबियों को अप्रैल फूल जरूर बनाया है।

दिन भर बिलासपुर के शराब के शौकीन एक भट्टी से दूसरे भट्टी का चक्कर लगाते नजर आए। इनमें से सौभाग्यशालियों को ही शराब नसीब हो पाई। प्रदेश सरकार का दावा है कि शराब की कीमतें बढ़ाने के साथ ही उन्होंने दुकानों की संख्या भी कम की है और इसी भरोसे दावा किया जा रहा है कि प्रदेश में शराब की खपत कम होगी लेकिन सच्चाई यही है कि साल दर साल शराब की खपत बढ़ती जा रही है और मदिरा प्रेमियों में नए नाम शुमार हो रहे हैं।
