
श्री कृष्ण के प्राकट्य पर भगवान की झांकी सजाई गई थी झांकी का श्रोताओं ने दर्शन लाभ लिया

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
जब व्यक्ति को धन, बल, जन, ज्ञान, का अहंकार हो जाता है तब वह सब कुछ भूल जाता है ,लेकिन वही सब शक्तियां जब काम नहीं आती तब व्यक्ति अकेला हो जाता है उसे फिर परमात्मा के सिवाय दूसरा दिखाई नहीं देता । इसलिए हर व्यक्ति को अहंकार छोडक़र भगवान का आश्रय लेना चाहिए ।
यह बातें पंडित गौतम मैहर धाम वाले ने पारिजात एक्टेशन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कहीं । पंडित गौतम ने चौथे दिन की कथा को बताते हुए कहा कि गज को अपने परिवार और अपनी ताकत का अहंकार हो गया हो गया था जब ग्राह सरोवर में गज को पकडक़र खींचा तब दोनों में जमकर युद्ध हुआ के परिवार के लोग उसे छोड़ कर चले गए अंतिम में भगवान को पुकारते हैं। भगवान गज की करुण पुकार सुनकर बचाने आते हैं।

भगवान विष्णु ग्राह को मुक्ति देते हैं। पं गौतम ने गज और ग्राह के पूर्व जन्म की कथा श्रवण कराते कहा कि गज और ग्राह गंधर्व थे दोनों अप्सराओं को हंसाते थे । एक दिन सरोवर में देवंग ऋषि आए तब उसके पैर ग्राह हूहू ने पैर को खींच लिया । तब ऋषि ने उसे ग्राह बने का श्राप दे दिया । जब उसने ऋषि के चरणें को पकड़ा तब ऋषि ने कहा कि जब भगवान की किसी भक्त का पैर खींचोगे तब भगवान उसे बचाने आएंगे और तुम्हारा उद्धार होगा । इसी तरह गज का नाम हाहा था कुचाल पर्वत में ब्रतधारण किया । तब अगस्त ऋषि पहुंचे । गज ने ऋषि का आदर सत्कार नहीं किया तब उसने क्रोध में आकर कहा कि भगवान विष्णु का भक्त बनता है , अपने श्रेष्ठ , गुरुजन, माता-पिता का सत्कार न कर हाथी जैसा बैठा है जा हाथी बन जा । भगवान के भक्त होने से उसे भी भगवान विष्णु ने मुक्ति दिलाई। दोनो फिर से गंधर्व बन गए ।
पं मनोज गौतम ने राजा बलि की कथा विस्तार से बताए । भगवान राम का जन्म और कृष्ण जन्म की कथा बताते हुए कहा कि दुष्टों व दुराचारियों केे संहार व संतों की रक्षा के लिए भगवान को अवतार लेना पड़ता है। श्री कृष्ण के प्राकट्य पर भगवान की झांकी सजाई गई थी । झांकी का श्रोताओं ने दर्शन लाभ लिया। इस बीच आतिशबाजी भी की गई भगवान के जन्म के समय वातावरण भक्ति मय में सराबोर हो गया