मल्हार

जैविक खेती से विभिन्न प्रकार की सब्जी उत्पादन के बाद अब सेब की खेती कर क्रांतिकारी कदम उठा रहा मल्हार का प्रगतिशील युवा किसान दम्पति दिव्या जदुनंदन वर्मा

हरिशंकर पांडेय

मल्हार – पारंपरिक रूप से जैविक पद्धति से 5 रंग के फूल गोभी के सफलतापूर्वक उत्पादन के बाद अब नव वर्ष 2023 की शुरुआत सेब फल के 100 पौधा के रोपड़ से नगर के प्रगतिशील किसान दिव्या जदुनंदन वर्मा ने किया है।

वर्मा दम्पति की जिद है कि वर्तमान में भारी मात्रा में उपयोग हो रहे रासायनिक खाद व कीटनाशक की उपयोगिता को बहुत ही कम कर लोगो को पौष्टिकता से भरपूर फल व अनाज मिल सके जिसके लिए वे कई तरह के प्रयोग करते रहते है इसलिए अब वे ठंड प्रदेशो में होने वाले सेव फल की उन्नत किस्म को मल्हार में लगाने की ठान ली है, एक हफ्ते पहले ही उन्होंने 100 पौधों की रोपाई भी कर ली है।

और उन्होंने सत प्रतिशत फल की अच्छी उत्पादन की उम्मीद जताई है। इससे पहले वर्मा दम्पति ने 5 कलर की फूल गोभी जैविक तरीके से उगाकर सैकड़ो किसानों को प्रेरित किया है, साथ ही उन्होंने 1 एकड़ जमीन में केले की फसल लगाकर दो वर्षों में 4 लाख से ज्यादा की कमाई भी की है। वर्मा दम्पति कहते है कि अब वे खेती किसानी की बारीकियों जिसमे पारम्परिक आधार बनाकर नवाचार को लेकर काम करते है। जिससे उन्हें कई जानकारियां भी मिल रही है। और सरकार के फसल परिवर्तन की मंशा को भी साकार कर रहे है।।

सेब फल लगाने मामा से मिली प्रेरणा

जदुनंदन वर्मा ने बताया कि जांजगीर चाम्पा जिले के बिर्रा में रहने वाले उनके मामा ने 3 सौ सेब का पौधा लगाया है जो बड़े होंकर जल्द ही फल देने लगेंगे, उनको देखकर वर्मा ने भी हाल ही में अपनी 60 डिसमिल जमीन में 100 पौधे हिमांचल प्रदेश के बिलासपुर से हरिमन 99 किस्म को मंगाकर लगाया है कुछ दिनों बाद सौ पौधे और रोपेंगे। उन्होंने बताया कि सेब का यह किस्म 45 से 47 डिग्री तापमान में भी हो सकता है। और इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसका फल आफ सीजन में आता है जिससे किसान मालामाल हो सकते है।

उन्होंने कहा कि खेती करने के लिए लगन, मेहनत व धैर्य सबसे ज्यादा जरूरी है साथ ही ईमानदारी पूर्वक लोगो की स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए शुद्ध फसल देने की होना चाहिए। उनका मानना है कि देश के सभी किसान ठान ले कि शुद्ध जैविक तरीके से पारम्परिक खेती आधुनिक सुविधा के साथ करे तो रासायनिक को खत्म किया जा सकता है। दिव्या वर्मा कहती है कि जैविक खाद बनाना भी बहुत आसान है, गोबर, गोमूत्र, गुड़, बेशन, नीम आदि के पत्तो से बेहतरीन खाद बनता है। गोठनो में भी वर्मी कम्पोस्ट खाद के लिए किसान जागरूक हो रहे है जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत है।

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