मल्हार

भव्य कलशयात्रा के साथ सहस्त्र चंडी महायज्ञ की पूजा हुई प्रारंभ….बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

हरिशंकर पांडेय

मल्हार – धर्मनगरी मल्हार में सोमवार को सहस्त्र चंडी महायज्ञ के लिए भव्य व दिव्य कलश शोभायात्रा निकाली गई जिसमे 6 सौ से ज्यादा कलश माताओं ने धारण किया। पहली बार इतना भव्य कलशयात्रा नगर में निकली जिसकी झलक पाने हजारो लोग उमड़ पड़े।

मेला चौक स्थित भगवान पातालेश्वर महादेव की विधिपूर्वक पूजन के बाद मुख्य कलशो में पवित्र खैया सरोवर का जल भरा गया जिसके बाद गाजे बाजे के साथ शोभायात्रा यज्ञ स्थल के लिए निकली। जिसमे माताए लाल व पीली साड़ी पहनकर क्रमबद्ध शांतिपूर्ण तरीके से कलश धारण की हुई थी। इससे पहले यज्ञ आचार्य ने 71 ब्राम्हणों के साथ स्वस्ति वचन व वैदिक मंत्रों का पाठ कर शंखनाद से माहौल को भक्तिमय बना दिया। शोभायात्रा के दौरान भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए नगर के लोगो ने बीच बीच में ठंडा सरबत व पानी का इंतजाम किया था।

जिससे कलश धारण की हुई माताओं को राहत मिला। कलशयात्रा के मंदिर पहुचने के बाद ट्रस्ट के सदस्यों ने चुनरी पहनाकर यजमानों का स्वागत किया जिसके बाद आचार्य ने यज्ञ विधान के अनुसार सभी कलश धारियों को परिक्रमा कराते हुए कलश को यथा स्थान रखवाकर पूजन प्रारम्भ कराया। आचार्य पण्डित किशोरशरण पाठक ने प्रथम दिन के पूजन विधि के बारे में बताया कि आज पंचांग पूजा, मंडप प्रवेश, देव आवाहन, अरनी मंथन, कन्या पूजन सहित यज्ञ के सभी अनुष्ठान के साथ संध्या आरती हुई।

बिलासपुर कलेक्टर सौरभ कुमार ने भी गुप्त नवरात्र के प्रथम दिन माता डिडनेश्वरी का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने यज्ञ को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराने आवश्यक तैयारियों का जायजा लिया व प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया। कलेक्टर ने ट्रस्ट की मांग को गम्भीरता पूर्वक जल्द पूरा कराने मस्तूरी एसडीएम महेश शर्मा को आदेश दिया कि वे जल्द ही कार्य की रूपरेखा बनाकर प्रस्तुत करे।।

यज्ञ प्रारम्भ की पूर्व संध्या लिया गया महत्वपूर्ण निर्णय

1991 में माता डिडनेश्वरी देवी की पावन मूर्ति की चोरी की घटना हुई थी, मूर्ति बरामद के बाद विधिपूर्व देवी प्रतिमा को पुनर्स्थापित किया गया गया था जिसके बाद सुरक्षात्मक दृष्टि से गर्भगृह में लोहे की पिंजरे नुमा लोहे की जाली से मूर्ति को रखा गया था। जिसके बाद पिंजरे में माता को रखने की आलोचना होंने लगी मगर सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आज तक पिंजरे को नही निकाला गया था।

परन्तु 32 वर्ष बाद माता को पिंजरे से मुक्त करने बिलासपुर तहसीलदार अतुल वैष्णव के पहल पर रविवार की शाम ट्रस्ट की आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक में श्री वैष्णव ने कहा कि समयानुसार अब पिंजरे को निकाला जाना चाहिए जिसके लिए उन्होंने कई तर्क दिए और कहा कि 32 वर्ष पूर्व परिस्थिति कुछ और थी पर अब बदले जमाने मे कुछ नया करना होगा उन्होंने माता डिडनेश्वरी पर निजी आस्था व्यक्त करते हुए भावनात्मक तरीके से सभी को विचार करने कहा।

ट्रस्ट के सदस्यों ने भी अपनी बात रखी जिसके बाद सर्वसम्मति से प्रस्ताव किया गया कि आज ही पुलिस की उपस्थिति में पिंजरे को निकाला जाएगा। इस तरह नगरवासियों की पुरानी पूरी हो गई और रविवार की रात पिंजरा निकाल दी गई। भव्य महायज्ञ की पूर्व संध्या इस महत्वपूर्ण निर्णय को लेकर नगरवासियों ने खुशी जाहिर की व लोगो ने पिंजरे मुक्त माता के गर्भगृह का दर्शन किया।

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