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अरपा साडा पर अमर अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखा खत, सभी पहलुओं पर दोबारा गौर करने का किया निवेदन

प्रवीर भट्टाचार्य

सोमवार को अरपा समिति की बैठक में अरपा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के विघटन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया था। बिलासपुर के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने परियोजना पर कांग्रेस सरकार द्वारा लिए गए निर्णय को बदलापुर की कार्यवाही बताया है। 2 दिन खामोश रहने के बाद बुधवार को पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के नाम एक पाती लिखी, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें सोशल मीडिया और समाचार पत्रों से इसकी जानकारी मिली तो वे हैरान रह गए। उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन किया कि अरपा साडा को विघटित करने से पहले पूरी परियोजना और उससे जुड़े समस्त पहलुओं का परीक्षण मुख्यमंत्री स्वयं करें, जिससे उन्हें यह भरोसा होगा कि इस परियोजना से ही बिलासपुर की जीवनदायिनी अरपा नदी को वास्तव में संरक्षित किया जा सकता है।

अमर अग्रवाल ने अपने पत्र में लिखा कि परियोजना के क्रियान्वयन का बस अंतिम चरण शेष है । अरपा नदी को बचाने के लिए इसमें मिलने वाले नाले नालियों के पानी को नदी के तट के समानांतर चैनल के माध्यम से पृथक से उपचारित किया जाएगा । इस परियोजना में सड़कों का एक ऐसा नेटवर्क प्रस्तावित है जिससे आने वाले वर्षों में ट्रैफिक संबंधी समस्याओं का समाधान भी संभव होगा। अरपा भैसाझार परियोजना के तहत अरपा नदी में 24% तक जल आरक्षण करने का प्रावधान किया गया है , जिससे कि अरपा नदी में 12 महीने जल रहे। बिलासपुर के मास्टर प्लान में भी अरपा नदी संबंधी विकास को देखा समझा जा सकता है।

श्री अग्रवाल ने अपने पत्र में जिक्र किया कि परियोजना में रिवर बेड संरक्षण,अम्बेकमेन्ट , घाट निर्माण बैराज ,एनीकट, सिटी पार्क, संग्रहालय 90 फूट सड़क समेत तमाम ऐसे पहलू को जोड़ा गया है जिससे बिलासपुर के विकास को नई गति मिलेगी और यह योजना मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने अपने पत्र में मुख्यमंत्री बघेल को लिखा कि राजनीतिक और दलगत भावनाओं से परे हटकर वे चाहते हैं कि बिलासपुर की जीवनदायिनी अरपा को नया स्वरूप मिले। पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने अरपा क्षेत्र में भूमि बिक्री हेतु अनापत्ति लेने का प्रावधान समाप्त करने के निर्णय पर भी दुख जताते हुए कहा कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जानकारियों छुपाई गई है। अनापत्ति लेने का प्रावधान केवल लोकहित में छोटे भूमि स्वामियों के हित के संरक्षण के लिए अरपा के किनारे अवैध तथा अनियमित विकास रोकने और शहर के विकास को मास्टर प्लान की दिशा में परिवर्तित करने हेतु रखा गया था ।उन्होंने यह भी कहा कि अनापत्ति प्राप्त करने की प्रक्रिया इतनी कठिन भी नहीं थी । अट्ठारह सौ करोड़ रुपए की परियोजना के वृहद आकार की वजह से ही देर होने की बात उन्होंने स्वीकार की है उन्होंने कहा कि लगभग 2000 हेक्टेयर की इस परियोजना में खसरा नंबर का सर्वे और 100 साल का फ्लड लेवल, प्लानिंग डिजाइन आदि में यह वक्त लगा है। उन्होंने यह भी कहा कि शासकीय कोष से राशि उपलब्ध नहीं हो सकती इसीलिए पीपीपी मॉडल पर इसे निर्माण करने का निर्णय लिया गया था जिसे पीपीपी कमेटी ने पास भी कर दिया है। उन्होंने इस बात को भी भ्रम बताया कि परियोजना के लागू होने से कई झुग्गी झोपड़ियां टूटेगी और लोग बेघर होंगे।

उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि कई स्थानों पर नारकीय जीवन जीने वाले झुग्गी झोपड़ी वासियों के लिए बिलासपुर में बेहतर आवास का निर्माण किया गया है। करीब 25 लाख रुपए कीमत वाले आवास इन झुग्गी झोपड़ी वासियों को उपलब्ध कराया गया है। श्री अग्रवाल ने निवेदन करते हुए कहा कि परियोजना से जुड़े सभी शासकीय प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। पीपीआर बनकर तैयार है और मुख्यमंत्री चाहे तो तत्काल डीपीआर बनवाने के लिए निविदा जारी कर सकते हैं ।अरपा साडा में काम शुरू होने में 1 माह का समय ही लगेगा। उन्होंने शक जाहिर करते हुए कहा कि इस परियोजना को बीडीए के माध्यम से कराया जाएगा तो इसका क्रियान्वयन और भी कठिन हो जाएगा। पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से निवेदन करते हुए कहा कि अरपा साडा के संबंध में कोई भी बड़ा निर्णय लेने से पहले परियोजना की पूरी जानकारी जुटाए और फिर बिलासपुर और बिलासपुर के नागरिकों के हितों का ख्याल रखते हुए ही ऐसा निर्णय ले। केवल राजनीतिक विद्वेष के चलते बिलासपुर का अहित ना करें।

आपको बता दें कि पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने अरपा नदी के विकास के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना तैयार की थी, जिसमें अरपा नदी को टेम्स नदी की तरह विकसित करने की योजना थी। इसके तहत नदी के दोनों किनारे रिटेनिंग वॉल, सड़क गार्डन, व्यावसायिक कांपलेक्स, एनीकट आदि बनाए जाने थे। कुल 18 सौ 50 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में अब तक चार करोड़ 50 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। ऐसे में अचानक से अरपा साडा को भंग कर दिए जाने से जहां परियोजना ठंडे बस्ते में चली जाएगी वहीं अब तक खर्च हुई राशि भी बर्बाद हो जाएगी।

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