बिलासपुर

VIDEO:सिलपहरी इंडस्ट्रियल एरिया में खनिज माफिया का साम्राज्य…. दो साल से जारी अवैध उत्खनन के आगे नतमस्तक खनिज विभाग, कैमरा देखते ही भागे हाईवा और जेसीबी चालक

उदय सिंह

बिलासपुर – जिले के सिलपहरी इंडस्ट्रियल एरिया में खनिज माफियाओं का दुस्साहस इस कदर बढ़ चुका है कि अब उनके सामने जिम्मेदार विभाग भी बेबस और नतमस्तक नजर आ रहे हैं। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के ग्राम बसिया और सिलपहरी के बीच स्थित औद्योगिक क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे अवैध उत्खनन का बड़ा खेल उजागर हुआ है। मौके पर पहुंची हमारी टीम ने जो दृश्य देखा, उसने खनिज विभाग, प्रशासन और औद्योगिक क्षेत्र की निगरानी करने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। औद्योगिक उपयोग के लिए आरक्षित समतल भूमि को लगातार खोदकर खदान का रूप दे दिया गया है। मौके पर जेसीबी मशीनों से बड़े पैमाने पर चिल्ली पत्थर निकालकर हाईवा वाहनों में भरा जा रहा था। लेकिन जैसे ही कैमरा मैन पर वहां काम कर रहे लोगों की नजर पड़ी, पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। एक हाईवा चालक तत्काल वाहन लेकर मौके से फरार हो गया, जबकि जेसीबी ऑपरेटर ने मशीन बंद कर दी और वहां से निकल गया। यह पूरा घटनाक्रम इस बात की ओर स्पष्ट संकेत करता है कि गतिविधियां नियमों और अनुमति के दायरे से बाहर संचालित की जा रही थीं। स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का कहना है कि यहां पिछले लगभग दो वर्षों से लगातार खुदाई चल रही है। प्रतिदिन भारी मशीनें और हाईवा वाहन क्षेत्र में आते-जाते देखे जाते हैं। रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक पत्थरों और मिट्टी का दोहन किया जा रहा है।

इसके बावजूद आज तक न तो खनिज विभाग ने कोई प्रभावी कार्रवाई की और न ही औद्योगिक क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों ने इस पर गंभीरता दिखाई।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब औद्योगिक क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में उत्खनन हो रहा था, तब खनिज विभाग के निरीक्षक, अधिकारी और उड़नदस्ता दल आखिर कहां थे? क्या विभागीय अमले को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा था? जिस स्थान पर अब विशाल गड्ढे और खदान जैसी संरचनाएं दिखाई दे रही हैं, वहां कभी समतल जमीन हुआ करती थी। इतनी व्यापक खुदाई बिना प्रशासनिक संरक्षण या विभागीय उदासीनता के संभव नहीं मानी जा सकती। खनिज माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे खुलेआम मशीनों के साथ उत्खनन कर रहे हैं और विभागीय कार्रवाई का उन्हें कोई भय नहीं दिखाई देता। यही कारण है कि अवैध खनन का यह कारोबार वर्षों से फल-फूल रहा है। क्षेत्र में चर्चा है कि यदि समय रहते इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।अब जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन, खनिज विभाग और संबंधित एजेंसियां तत्काल संयुक्त जांच कर अवैध उत्खनन में शामिल लोगों की पहचान करें तथा यह भी स्पष्ट करें कि आखिर दो वर्षों से चल रहे इस खेल पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। अन्यथा यह माना जाएगा कि सिलपहरी इंडस्ट्रियल एरिया में खनिज माफिया नहीं, बल्कि उनका संरक्षण तंत्र सबसे ज्यादा मजबूत है।

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