
रमेश राजपूत

बिलासपुर– रेलवे पार्सल सर्विस में एक बड़ी चूक कहे या लापरवाही पकड़ में आई है जिसकी जांच अब भी अधूरी है। पार्सल सर्विस के तहत आपराधिक घटना को अंजाम दिया गया है, बावजूद इसके मुख्य कड़ी के आरोपियों को छोड़ एक पार्सल एजेंट को इसमें आरोपी बनाया जा रहा है, ग़ौरतलब है कि बीते 10 अक्टूबर को बिलासपुर से मेरठ भेजे गए पार्सल को रिसीव करने जब कोई नहीं पहुंचा, तो मेरठ जीआरपी ने संदेह के आधार पर उस पार्सल को खोलकर देखा, तो उसमें 61 किलो गांजा निकला। जिसके बाद इस मामले में मेरठ से लेकर बिलासपुर तक विभाग में खलबली जरूर मची, लेकिन इस मामले की पड़ताल किये बगैर बिलासपुर से पार्सल बुक करने वाले एजेंट चंद्रशेखर यादव को जरूर बलि का बकरा बनाया जा रहा है। मीडिया ट्रायल में चंद्रशेखर यादव को मुख्य आरोपी तक घोषित कर दिया गया,जबकि मामले की तह में जाने से पता चलता है, कि चंद्रशेखर यादव तो खुद इस षड्यंत्र का शिकार हुआ है।
गांजा ऐसे पहुँचा
इस मामले की तह तक जाकर इसके चैन सिस्टम को समझना जरूरी है। उड़ीसा से एक पार्सल मेरठ के राकेश चौधरी ने रायपुर के ईश्वर उर्फ पप्पू गुप्ता के पास भेजा। उसने उस पार्सल को रायपुर के धर्म सिंह राजपूत को दिया। धर्म सिंह राजपूत ने यह 2 कार्टून पार्सल इमरान को दिया, जिसकी राजधानी ट्रेन में लीज है। इमरान के ही सहयोगी सांतनु साहू ने 9 अक्टूबर को रायपुर से राजधानी ट्रेन से पार्सल लाकर बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर बिलासपुर राजकिशोर नगर में रहने वाले पार्सल एजेंट चंद्रशेखर यादव को दिया, और उसने हमेशा की तरह उस पार्सल को आगे बढ़ाया।
गुमराह कर भेजा गया पार्सल
चंद्रशेखर द्वारा मेरठ के किसी सुनील कुमार के नाम से पार्सल भेजा गया था। चंद्रशेखर को बताया गया था, कि उस पार्सल में पुराने कपड़े हैं, चंद्रशेखर ने पार्सल को ऊपर से देखा, तो उसे ऐसा लगा भी कि उसमें कंबल आदि है, लेकिन जब यह पार्सल मेरठ रेलवे स्टेशन पर तीन-चार दिन तक पड़ा रहा, और कोई इसे रिसीव करने नहीं आया, तो संदेह होने पर जीआरपी ने पार्सल खोला, तो उसमें बड़े ही तरीके से कंबलों के बीच 61 किलो गांजा छुपाकर रखा गया था। इस मामले में जाहिर तौर पर पार्सल बुक करने वाला राकेश चौधरी और सुनील कुमार दोषी है। बीच के सारे लोगों को तो सिर्फ मोहरा बनाया गया है। मगर हैरानी इस बात की है, कि यही पार्सल रायपुर से राजधानी ट्रेन से बिलासपुर पहुंचता है, लेकिन उसे रायपुर से पार्सल बोगी में सवार करने से पहले किसी तरह की पुख्ता जांच नहीं होती। ऐसे में ट्रेन में कुछ भी भेजा जा सकता है। शायद इसी का लाभ गांजा तस्करों ने भी उठाना चाहा। चंद्रशेखर यादव ने भी ट्रेन में सामान लोड करने से पहले ना तो पार्सल की कोई जांच की, और ना ही इस बार की। लेकिन इस बार उनका दुर्भाग्य था, कि उनके द्वारा भेजे गए पार्सल में गांजा निकला।
रेलवे प्रशासन जागा
इस मामले में कहीं ना कहीं जिम्मेदारी रेलवे की भी है, जिनके द्वारा यह व्यवस्था ही नहीं है, कि रेलवे में बुक होने से पहले पार्सल की पुख्ता जांच हो। ऐसे में ट्रेनों से नशीले पदार्थ या अवैध हथियार भी भेजे जा सकते है। हालांकि इस घटना ने रेलवे की आंखें खोल दी है, और जल्द ही सभी पार्सल स्कैन कर भेजने का निर्णय लिया गया है, तो वही मेरठ जीआरपी अपने स्तर पर जांच कर रही है,उसने बिलासपुर जीआरपी को फिलहाल इस जांच में शामिल तक नहीं किया है। इतना ही नही जांच पूरी किये बिना ही रेलवे पार्सल एजेंट चंद्रशेखर यादव का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है।
चंद्रशेखर ने बताया खुद को निर्दोष

चंद्रशेखर के मुताबिक, वह पिछले 11 सालों से रेलवे पार्सल एजेंट है, और इससे पहले इस तरह के कोई आरोप उन पर नहीं लगे। चंद्रशेखर यादव ने खुद को बेगुनाह और षड्यंत्र का शिकार बताते हुए कहा, कि उसकी बातें सुने बगैर ही मीडिया ने चंद्रशेखर को ही मुख्य आरोपी घोषित कर दिया। जबकि वह तो इस घटनाक्रम की एक कड़ी बस है, जो अनजाने में इसका हिस्सा बन गया।
जीआरपी की जांच धीमी
रेलवे जीआरपी ने यह कभी नहीं कहा कि चंद्रशेखर यादव ही मुख्य आरोपी है। इसीलिए फिलहाल उनकी गिरफ्तारी की बात भी हवा हवाई है। जीआरपी उन लोगों की तलाश कर रही है जिन्होंने पार्सल बुक किया था और जिनके नाम बुक किया गया था। उनके पकड़े जाने के बाद ही असली गुनहगारों के चेहरे से पर्दा हटेगा।