बिलासपुर

10 साल की बच्ची के जीवन में रौशनी की नई किरण…सिम्स के चिकित्सकों ने जन्मजात मोतियाबिंद का किया सफल ऑपरेशन,

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – संभाग के सबसे बड़े शासकीय हॉस्पिटल सिम्स के कुशल डॉक्टरो ने 10 साल की बच्ची के जीवन में रौशनी की नई किरण भर दी है। जहा जन्मजात मोतियाबिंद की बीमारी से जूझ रही बच्ची का सफल ऑपरेशन पर उनके आंखो की रौशनी को वापस लौटाया है। मिली जानकारी के अनुसार मुंगेली जिले की 10 वर्षीय बालिका जो जन्मजात दोनों आँखों में मोतियाबिंद (congenital cataract) से ग्रसित थी। जहा जन्म से ही उनकी आंखों की रोशनी कमजोर थी। जिसे उनके परिजनों ने अंधत्व निवारण और चिरायु योजना के तहत चिन्हांकित करके मुंगेली से सिम्स में उपचार के लिए लाया गया। जहां डॉ. प्रभा सोनवानी द्वारा जांच किया गया। जांच में पता चला कि दोनों आँखों में मोतियाबिंद पाया गया। इसको लेकर डॉक्टरों की टीम ने वर्तमान में दाहिनी आँख का ऑपरेशन करके कृत्रिम लेंस लगाया गया है जिससे बालिका की नजर में पूर्ण सुधार आ गया है। यह ऑपरेशन नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. सुचिता सिंह, अधिष्ठाता डॉ. रमनेश मुर्ति एवं चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह के मार्गदर्शन में किया गया हैं और सफल ऑपरेशन के बाद नेत्र रोग विभाग एवं टीम का हौसला बढ़ाया हैं। इस मामले डाक्टरों ने जानकारी देते हुए बताया कि मोतियबिंद की बीमारी सिर्फ बुर्जुगों में ही नही बल्कि जन्मजात तथा बढ़ते बच्चों में भी यह बीमारी पाई जाती है। जिसे की Congenital Cataract और Developmental Cataract कहा जाता है। बच्चों की आँख में सफेदी दिखाई देना और बच्चे की नजर का कमजोर होना यह सामान्यतः लक्षण पाया जाता है। जिसका उपचार समय रहते किया जाए तो बच्चे की नजर में सुधार की अच्छी संभावना रहती हैं वही अगर इसके उपचार में देरी होती है तो नजर में पूर्ण सुधार की संभावना कम हो जाती है। इसके उपचार के लिए मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया जाता हैं और कृत्रिम लेंस डाला जाता है। जिससे नजर में सुधार आता है। यह ऑपरेशन सिम्स के नेत्र रोग विभाग में सफलता पूर्वक किया जा रहा है। विगत वर्षों में अब तक लगभग 100 बच्चों का सफल मोतियाबिंद ऑपरेशन डॉ. सुचिता सिंह एवं डॉ. प्रभा सोनवानी द्वारा किया जा चुका हैं। बताया जा रहा है। कि चिरायु योजना से मुंगेली जिला के शंशाक उपाध्याय (AMO) द्वारा मरीज को सिम्स में इलाज के लिए लाया गया था। चिरायु योजना द्वारा चिन्हांकित कर भविष्य में बिलासपुर संभाग के अन्य मोतियाबिद ग्रसित बच्चों की जांच एवं उपचार के लिए जागरूक किया जाए ताकि बच्चों को अंधत्व निवारण किया जा सकें।

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