
गौरी मिश्रा के साथ उसके पूरे परिवार को यकीन है कि बुलंद इरादों वाली गौरी मिश्रा एक दिन जरूर अपना लक्ष्य हासिल करेगी और आईएस अफसर बन कर पूरे परिवार को गौरवान्वित होने का अवसर देगी

सत्याग्रह डेस्क
शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा दसवीं और बारहवीं बोर्ड के नतीजे घोषित किए गए । पूरे प्रदेश में तो लड़कियों ने बाजी मारी ही अगर हम बात बिलासपुर की करें तो यहां भी बेटियों ने शहर को एक बार फिर गौरवान्वित होने का अवसर दिया है। एक तरफ जहां 12वीं बोर्ड की परीक्षा में क्षमा और विनीता ने अपना लोहा मनवाया , वहीं गौरी मिश्रा 94.20% अंक हासिल कर भारत माता स्कूल में टॉपर बनी है। दसवीं कक्षा की छात्रा गौरी मिश्रा मूलतः कन्नौज की है , लेकिन आरंभ से ही मेधावी गौरी अपने बुआ के घर रह कर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है। गगन और पुष्पा मिश्रा की बेटी गौरी मिश्रा कपिल नगर में अपने बुआ के घर रहकर पढ़ाई करती है। आम तौर पर माना जाता है कि अपने घर से दूर रहकर रिश्तेदार के घर में रहकर पढ़ाई सही ढंग से मुमकिन नहीं हो पाती , लेकिन गौरी मिश्रा ने इसे गलत साबित कर दिखाया है ।शुक्रवार को घोषित परिणाम में गौरी मिश्रा ने कुल 565 अंक हासिल किए हैं। गौरी को सभी विषयों में डिस्टेंशन हासिल हुए हैं। गौरी को इंग्लिश में 91 , हिंदी में 91, संस्कृत में 93, गणित में 97 साइंस में 97 और सोशल साइंस में 96 अंक मिले हैं। भारत माता स्कूल की छात्रा गौरी मिश्रा पिछले 2 सालों से बिलासपुर में रहकर पढ़ाई कर रही है और नवी कक्षा में भी उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। पढ़ाई के अलावा गौरी की खास दिलचस्पी डांस और सिंगिंग में भी है, लेकिन उसने पढ़ाई और हॉबी के बीच में संतुलन बनाना सीख लिया है ।परीक्षा के दौरान गौरी मिश्रा ने 10 से 12 घंटे पढ़ाई की।

गौरी मेहनत को ही सफलता की कुंजी मानती है और भविष्य में आईएएस अफसर बनना चाहती है। अपनी सफलता का श्रेय एक तरफ जहां गौरी अपने स्कूल और शिक्षकों को दे रही है, वहीं अपने भाई देवर्षि और महर्षि बाजपेई के अलावा दादा ,दादी, बुआ ,फूफा और पूरे परिवार को देती है, जिनके सहयोग से ही उसने यह कामयाबी हासिल की है। शुक्रवार को जैसे ही नतीजे घोषित हुए और गौरी मिश्रा को पता चला कि उसने 94 से अधिक प्रतिशत अंक हासिल किए हैं तो उसके घर जश्न आरंभ हो गया। गौरी मिश्रा के साथ उसके पूरे परिवार को यकीन है कि बुलंद इरादों वाली गौरी मिश्रा एक दिन जरूर अपना लक्ष्य हासिल करेगी और आईएस अफसर बन कर पूरे परिवार को गौरवान्वित होने का अवसर देगी।