मल्हार

किसानों ने मवेशियों को लेकर जाहिर की चिंता…फसलो को बचाने अभी से कवायद शुरू, हो निश्चित व्यवस्था,

हरिशंकर पांडेय

मल्हार – पिछले वर्ष किसानों ने अपने धान के फसल को मवेशियों से बचाने एकजुट होकर व्यवस्था बनाई थी जो फायदेमंद साबित हुआ था हालांकि इस कवायद में किसानों को कड़ी मेहनत भी करना पड़ा था। इस वर्ष भी फसल बचाने अभी से तैयारी की जा रही है जिसके लिए रविवार को ठाकुरदेव परिसर में आवश्यक बैठक रखी गई जिसमें बड़ी संख्या किसान पहुचे व अपने सुझाव दिए। किसानों के इस एकजुटता व प्रयास से आवारा घूमने वाले मवेशियों को भी अस्थाई रूप से रहने की जगह मिल जाती है साथ ही उनके चारा पानी के लिए किसान चन्दा इकट्ठा कर चारे के साथ छायादार जगह बनाने में मदद करते है, हालांकि इस तरह की स्थिति हर वर्ष बनती है जिसके लिए आवश्यक कदम उठाया भी जाता है परन्तु इस वर्ष आवारा मवेशियों में इजाफा होने की आशंका के कारण पहले से तैयारी में जुट गए है।

किसानों ने बियासी के पहले स्थाई जगह सुनिश्चित करने कहा और नही होने की स्थिति में पुरानी व्यवस्था को अपनाय जाने की बात रखी। किसान रामन रजक ने परमानेंट व्यवस्था बनाने की बात कही। इस बार भी तत्कालीन रूप से फसल बचाने अस्थाई व्यवस्था किसानों की समिति बनाकर किया जाएगा इसके लिए 15 दिन बाद फिर से बैठक होगी जिसमें निर्णय लिया जाएगा। पैरा व शेड की व्यवस्था की जाएगी। पार्षद पीयूष पाटले ने मवेशियों के लिए चारा पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कहते हुए कई सुझाव दिए। कही। बैठक में राजू गणेश तिवारी ने पिछले वर्ष की व्यवस्था की जानकारी देते हए इस वर्ष के लिए बेहतर सुझाव किसानों को देने कहा। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि धनेश्वर कैवर्त ने किसानों को हित को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था बनाने की बात कही। इसी तरह राजकुमार वर्मा, अरविंद साहू, नर्मदा भैना, पार्षद आशुतोष वर्मा, रंजन साहू, मनराखन कैवर्त, मिथुन यादव, सुजीत राजभानु, विष्णु कैवर्त ने भी सुझाव दिया।

गौ अभ्यारण बनने से होगा समस्या का हल…. गौ पालक युवा किसान प्रवीण तिवारी का कहना कि बुजुर्ग बताते है कि एक जमाना ऐसा भी था ,जब लोगों की समृद्धि का प्रतीक गाय की संख्या पर आधारित था। गांव में जिसके पास गायो की संख्या अधिक होती थी वह व्यक्ति संम्पन माना जाता था। आज समय बदल गया है एक किसान एक गाय भी नही पाल पा रहा है। घर से बेघर गायों की दयनीय एवं दारूण दशा का वह दृश्य देखकर सिहर उठता है “गाँव के बाहर खुले बाड़े में घिरे, पेट सिकुड़े हुए कई दिनों पेट मे दाना नही पड़ा है ,भूख से व्याकुल अपनी बेबसी पर आँसू बहाते उनकी पीड़ा पर कौन ध्यान देगा, यह जिले की किसी एक गांव की व्यथा नही है यह स्थिति लगभग सभी जगह है इसलिए अब सरकारों को गौ वंश को बचाने अभ्यारण बनाने की जरूरत है।

किसान अवध प्रजापति का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार और गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष से निवेदन है कि घर से बेघर हमारी गौ माताओं की व्यथा के निराकरण हेतु कोई ठोस कदम उठायें। गाँव गरीब किसान के साथ गाय पर भी ध्यान दिया जावे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कोटा विकासखण्ड के ग्राम जोगीपुर में विशाल गौ अभयारण्य विकसित किया जा रहा है। लगभग 154 एकड़ भूमि इसके लिए चिन्हांकित की गई है। इसी तरह मस्तूरी मल्हार क्षेत्र में भी गौ अभ्यारण बनाने की दिशा में अधिकारियों को स्थल चिन्हांकित किया जाना चाहिए जिससे गौ वँशो की रक्षा हो सके।

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