
देखना होगा किशोरी की कुर्बानी रंग लाती है या फिर इस मामले में भी लीपापोती कर ली जाती है
ठा. उदय सिंह
समय-समय पर झोलाछाप डॉक्टर पर कारवाही के दावे किए जाते हैं ,लेकिन सच्चाई यही है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग चिकित्सकीय सेवाओं के लिए पूरी तरह झोलाछाप डॉक्टरों पर ही आश्रित है। सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत झोलाछाप डॉक्टर से भी खराब है। विश्वसनीयता के अभाव में लोग झोलाछाप डॉक्टर के चंगुल में फंसते हैं और अपनी जान गंवाते हैं । मामूली उल्टी के बाद इन झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराने की वजह से किशोरी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। मस्तूरी क्षेत्र के ग्राम सरगवा में एक किशोरी झोलाछाप डॉक्टर का शिकार बनी। 14 वर्षीय रागिनी टंडन की तबीयत खराब थी और उसे उल्टी हो रही थी। इसके बाद उसका भाई उसे मस्तूरी मल्हार मार्ग स्थित दीपू हालदार नाम के झोला छाप डॉक्टर के यहां इलाज कराने लेकर पहुंचा । इस झोलाछाप डॉक्टर ने किशोरी को 2 इंजेक्शन लगाए और कुछ दवाई दी। जिसके बाद रागिनी को लेकर उसका भाई घर चला गया । रात में रागिनी की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और उसके हाथ पैर ठंडे पड़ गए।
घबराए परिजन उसे लेकर आनन-फानन में मस्तूरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे जहां चिकित्सकों ने किशोरी को मृत घोषित कर दिया ।इसके बाद आक्रोशित परिजनों ने थाने पहुंचकर झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से महज थोड़ी ही दूरी पर दर्जनभर झोलाछाप डॉक्टर अपने क्लीनिक चला रहे हैं । हैरानी इस बात की है कि फिर भी यह स्वास्थ्य अधिकारियों को नजर नहीं आता । या फिर अधिकारी अपनी जेब गर्म कर जांच के नाम पर खानापूर्ति करते हैं । बिना डिग्री, जानकारी और प्रशिक्षण के यह झोलाछाप डॉक्टर मौत का फरिश्ता बनकर ग्रामीण क्षेत्रों में मौत बांट रहे हैं। लंबे वक्त से झोलाछाप डॉक्टर पर किसी तरह की कार्यवाही ना होने से भी इनके हौसले बढ़ चुके हैं । देखना होगा किशोरी की कुर्बानी रंग लाती है या फिर इस मामले में भी लीपापोती कर ली जाती है।