बिलासपुररेलवे

पर्यावरण संरक्षण में रेलवे का अहम योगदान ,पिछले वर्ष 6.18 लाख से भी अधिक वृक्ष लगाये गए

आलोक

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के तीनों मंडलों के बिलासपुर, रायपुर एवं नागपुर मंडलों के सभी महत्वपूर्ण नगरों में स्थित रेलवे कालोनियों में एवं रेलवे के कार्यालय, स्टेशन परिसरों में हरियाली अपेक्षाकृत अधिक है, यह बात सभी स्वीकारते है, यही नहीं रेल कालोनियों की हरियाली से आकर्षित हो कर अधिकांश लोग यहाँ मार्निंग एवं इवनिंग वाक् करने आते है | दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, ना सिर्फ किसी विशेष अवसर पर बल्कि पूरे वर्ष भर जल, पर्यावरण एवं वातावरण को संरक्षित रखने के लिए प्रयासरत रहती है । पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में पिछले वर्ष लाखो वृक्ष लगाये है, इसी प्रकार वित्तीय वर्ष 2018-19 में भी 6 लाख 18 हजार से भी अधिक वृक्ष लगाये गए ताकि वातावरण को और अधिक हरा- भरा रखा जा सके और गर्म होते वातावरण को कुछ हद तक ठण्ड किया जा सके । इस प्रकार वृक्षारोपण की दृष्टी से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कार्य क्षेत्र में आने वाले चारो राज्यों छतीसगढ़, मध्यप्रदेश, ओड़िसा एवं महाराष्ट्र के वन विभाग के साथ मिलकर भी रेलवे के खाली ज़मीनों में वृक्षारोपण कराया जा रहा है |
इसके साथ ही साथ स्टेशन परिसर, प्लेटफार्म, गाडी तथा रेलवे ट्रैक को गंदगी से मुक्त रखने तथा वातावरण को साफ-सुथरा रखने एवं हरित विकास को बढ़ावा देने हेतु रेलवे द्वा

रा यात्री गाड़ियों के कोचों में बायो-टायलेट लगाये जा रहे है । इस दृष्टी से वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में मई 2019 महीने तक 1183 कोचों में 4188 बायो-टैंक लगाए जा चुके है एवं बाकी कोचो में भी बायो-टैंक जून, 2019 तक लगा देने का लक्ष्य रखा गया है । दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे द्वारा जल प्रबंधन एवं जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एवं धरातल के अंदर के जल के स्तर को बढ़ाने के लिए रेलवे के भवनों विशेषकर नए भवनो के छ्तो मे बारिश के पानी को संग्रहण करने के लिए जल संचयन रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली की योजना पर भी काम किया जा रहा है | दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के अधिकार क्षेत्रों मे अबतक 161 से अधिक कार्यालय भवनों, तथा ज़ोन के प्रमुख इमारतों मे इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है । इसके साथ ही साथ निर्माणाधीन एवं भविष्य की सभी निर्माण हो रहे भवनों मे वर्षा जल संचयन रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए मुख्यालय के द्वारा भवनों के छ्तो के द्वारा वर्षा जल संचयन प्रणाली का प्रावधान एवं सामान्य व्यवस्था हेतु एक विस्तृत ड्राइंग सभी स्तर पर मुख्यालय, मंडलों एवं वर्कशापों मे भी क्रियान्वित करने का निर्देश दिया गया है। अब भविष्य बनने वाले सभी भवनो रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली लगाना अनिवायरी कर दिया गया है ।

वर्षा जल संचयन रेन वाटर हार्वेस्टिंग के अलावा दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे के कोचिंग डिपो, बिलासपुर एवं दुर्ग मे 0.5 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के वाटर रिसाईकिलिंग प्लांट की भी स्थापना की गई है । जिसमें डिपो मे गाड़ियों की धुलाई के बाद प्राप्त अवशिष्ट पानी को रिसाईकिलिंग कर ईसका उपयोग पुनः कोच की धुलाई के लिए एवं पौधों की सिचाई के लिए उपयोग मे लाकर पानी की बचत की जाती है । रिसाईकिलिंग प्लांट से प्रतिदिन लगभग 60 हजार से 75 हज़ार लीटर पानी की बचत की जा रही है । इसी प्रकार के वाटर रिसाईकिलिंग प्लांट कोचिग डिपो, गोंदिया सहित तीन अन्य जगहो पर बनाई जा रही है ।इसके साथ ही कोचिग डिपो, बिलासपुर स्थित मेकेनाईज्ड लोंड्री मे भी एक स्टीम कंडेशनिंग प्लांट की स्थापना की गई है । जिसकी मदद से कपड़ों को प्रेस करने के बाद उपयोग किए गए पानी को पुनः शोधन कर उपयोग किया जाता है । जिससे प्रतिदिन 5000 लीटर पानी की बचत की जाती है । प्लेटफार्म की सफाई के लिए कम से कम पानी के खपत को प्रोत्साहित करते हुए हाई प्रेशर जेट प्रणाली मशीन का उपयोग किया जा रहा है जिसमे पानी के साथ हवाको मिलाकर उपयोग किया जा रहा है | पानी की बर्बादी की रोकथाम एवं वर्षा जल संरक्षण करके , दक्षिण पूर्व मध्य रेल्वे द्वारा पर्यावरण सरक्षण मे अपना महत्वपूर्ण योगदान कर रही है, साथ ही साथ रेल यातायात को ईको फ़्रेंडली साधन के रूप मे अपना सेवा प्रदान कर रही है । इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण की दृष्टी से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने सौर ऊर्जा को काफी बढ़ावा दे रही है ताकी ऊर्जा के गैर पारंपरिक श्रोतो के उपयोग को भी बढ़ावा दी जा सके | इस दृष्टी से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे द्वारा 54 मेगा वाट क्षमता प्राप्त करने का लक्ष्य है | हमने अब तक 1 मेगा वाट की क्षमता के सोलर पावर प्लांट इंस्टाल कर चुके है एवं इसके तहत भंवरटैंक रेलवे स्टेशन एवं कालोनी को पूरी तरह सौर-ऊर्जा के द्वारा संचालित स्टेशन के रूप में विलसित कर संचालित किया जा रहा है, इसके साथ ही साथ जोन के अनेकों दूर-दराज के रेलवे फाटकों पर भी सोलर पावर का उपयोग शत-प्रतिशत किया जा रहा है | ऊर्जा संरक्षण की दृष्टी से एवं बल्बों के जलने से उत्सर्जित ताप को कम करने के उद्देश्य से हमने अपने 260 स्टेशनों में LED लाईट लगा चुके है एवं स्टेशनों, रेलवे के कालोनियों एवं आवासों में 27 हज़ार बल्बों को LED लाईट में परिवर्तित कर चके है एवं यह प्रक्रिया जारी है | इस प्रकार दक्षिण पूर्व मध्य रेल द्वारा हमेशा से ही पर्यावरण संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन की दृष्टी से बहुआयामी कार्यक्रम चलते हुए बढ़-चढ़कर काम किया जा रहा है | चाहे सौर ऊर्जा से सम्बंधित हो, जल संचयन या जन संवर्धन के कार्य हो या फिर बायो टायलेट, वृक्षारोपण हो सभी क्षेत्र में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे पर्यावरन पर कार्य करते हुए अपनी सकारात्मक भागीदारी पूरी कर अपनी जिम्मेवारी निभा रही है |

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