मुंगेली

रामगढ़ के सरपंच के समर्थन में 17 पंचों ने भी दिया इस्तीफा

आकाश दत्त मिश्रा

मुंगेली में नाटकीय घटनाक्रम के बाद 17 पंचों ने अपर कलेक्टर को अपना इस्तीफा सौंप दिया। मुंगेली ब्लॉक के ग्राम पंचायत रामगढ़ के ग्रामीण बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और 17 पंचों ने एक साथ अपर कलेक्टर को इस्तीफा सौंपकर प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी ।शिकायत यह है की ग्राम पंचायत रामगढ़ में मूलभूत सुविधाएं तक ग्रामीणों को उपलब्ध नहीं है।पानी के लिए ग्रामीण तरस रहे है। बुनियादी ज़रूरत तक पूरा न कर पाने की सूरत में सरपंच और पंचों ने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा। पानी की समस्या न सुलझा पाने की वजह से कुछ दिन पहले सरपंच संजय सोनी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब उनके समर्थन में ग्राम पंचायत के 17 पंचों ने एक साथ अपर कलेक्टर राजेश नशीने को अपना इस्तीफा सौंपा ।

इसके लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर पहुंचे और उन्होंने अपने सरपंच, पंचो का समर्थन किया। ग्राम पंचायत रामगढ़ के सरपंच संजय सोनी का कहना है कि साल 2016 से ही उनके गांव में पीने के पानी की किल्लत है। इस समस्या को सुलझाने के लिए उन्होंने अधिकारियों और नेताओं के दरवाजे के खूब चक्कर काटे, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पाया। ग्राम पंचायत रामगढ़ के नाम 2011 सर्वेक्षण सूची में नहीं होने के कारण ग्रामीणों को प्रधानमंत्री आवास, पेंशन, राशन कार्ड में नाम जोड़ने और शासन की अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।

इन समस्याओं को लेकर ग्रामीण उन तक पहुंचते हैं और वे जनपद पंचायत, जिला पंचायत, कलेक्टर, विधायक और मुख्यमंत्री के पास केवल शिकायत ही कर पाते हैं। 4 सालों में रामगढ़ ग्राम पंचायत में सिर्फ समस्याओं का अंबार लगा है, इनका निपटारा नहीं हो पाया। निराश होकर सरपंच को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। उन्हीं के समर्थन में उतरे 17 पंचों ने भी इस्तीफा देकर पंचायती राज व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी ।

इस दौरान पंच और सरपंच का इस्तीफा लेने वाले अतिरिक्त कलेक्टर राजेश नशीनें ने कहा कि उनका इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा या नहीं यह कलेक्टर के साथ चर्चा के बाद स्पष्ट होगा

यह सिर्फ सामूहिक इस्तीफा नहीं बल्कि शासन की व्यवस्थाओं के खिलाफ एलान ए जंग है। इस तरह शासन को आईना दिखाया जा रहा है कि किस तरह पंचायती राज व्यवस्था के नाम पर शक्ति का बंटवारा निचले स्तर तक करने का दावा जरूर किया गया लेकिन हकीकत यह है कि अभी भी पूरी ताकत मुख्यालय में बैठे अधिकारियों के पास है। जो पंच और सरपंच बेईमानी कर रहे हैं उनकी जेब भर रही है लेकिन जो सचमुच अपने गांव और ग्रामीणों के लिए कुछ करना चाहते हैं उनकी हालत संजय सोनी जैसी है। लेकिन जिस तरह संजय सोनी का समर्थन पंच और ग्रामीणों ने किया है, उससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि अगर जनप्रतिनिधि ईमानदार होगा तो फिर जनता भी उनके साथ खड़ी होगी। देखना होगा अब प्रशासन थोक में मिले इन इस्तीफा पर क्या फैसला लेती है।

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