बिलासपुर

सर्पदंश के उपचार में सिम्स निभा रही कार्य कुशलता, बारिश शुरू होते ही बढ़ते है मामले….तत्काल उपचार और दवाओं से ठीक हो रहे मरीज…2 साल की बच्ची भी हुई स्वस्थ

भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर – बारिश के मौसम में सर्पदंश का खतरा बना रहता है। जिसमे थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित होती है। कुछ इसी तरह के मामलों को लेकर सिम्स के डॉक्टर अब संजीदगी दिखा रहे है। दरसअल सिम्स में तीन दिन पहले मंगला क्षेत्र के मोहम्मद रज्जाक की 2 वर्षीय बच्ची एलिजा परवीन को सांप ने काट लिया था। जिसके बाद उसे गंभीर हालात में परिजनों ने उपचार के लिए सिम्स में भर्ती कराया था । बच्ची का वेंटीलेटर में इलाज किया जा रहा था। जहाँ सिम्स के डॉक्टरो ने गंभीरता पूर्व इलाज किया। जिसके बलबूते महज तीन दिनों में ही मासूम को होश आ गया। डॉक्टरो के अनुसार वह अब जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगी। परिजनो की माने तो गुरुवार की सुबह तकरीबन सुबह 4 बजे जब पूरा परिवार सो रहा था इसी दौरान सांप ने उसे काट लिया था समय पर उपचार मिलने से बच्ची की जान बच गई और वो स्वस्थ्य है। सिम्स प्रबंधन की माने तो सर्पदंश का यह पहला मामला नही है। आकड़ो की माने तो जनवरी माह से अब तक 37 ऐसे सर्पदंश के केस आए हैं। जिनमे सभी मासूम जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। लेकिन सिम्स के कार्यकुशल डॉक्टर और नर्सो द्वारा किए सघन उपचार ने उन्हें नया जीवनदान दिया है। इन कार्यों में एचओडी डॉ. राकेश नहरेल, डॉ. वर्षा तिवारी, डॉ. स्वाति यादव, डॉ. पूनम अग्रवाल, डॉ. अभिषेक कलवानी, डॉ. आलोक कश्यप और डॉ. अतीन की भूमिका सराहनीय रही है। 

सर्पदंश के मामलों में जागरूकता की कमी बनती है मौत की वजह..

सर्पदंश को लेकर ग्रामीण तथा शहरीय क्षेत्रों में अब भी काफी जागरूकता की कमी है। जानकार मानते है कि ग्रामीण क्षेत्र में सर्पदंश के मामले आने पर झाड़-फूंक का सहारा लिया जाता है। इसके चलते मरीज देर से हॉस्पिटल पहुँचते है। इस बीच पूरा जहर शरीर में फैल जाता है इससे मौत हो जाती है। इन मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सलाह दिया है कि सांप कांटने के बाद लोग बैगा-गुनिया से झाड़-फूंक के चंगुल में न फंसे बल्कि पीड़ित रोगी को सीधे अस्पताल पहुंचाएं।

सर्पदंश के दिखे लक्षण तो तुरंत कराए उपचार..

जानकारो का मानना है तो सर्पदंश के बाद निम्न प्रकार के लक्षण मरीज में दिखाई देते है। जिसमे सांप काटने के स्थान पर दांतों के निशान काफी हल्के होते हैं। दंश स्थान पर तीव्र जलन, पीड़ा, खुजलाहट, पलकों का गिरना, अनैच्छिक मल-मूत्र त्याग, मिचली आना, किसी वस्तु का दो दिखाई देना, अंतिम अवस्था में चेतनाहीनता, मांसपेशियों में ऐंठन और हाथ-पैरों में झनझनाहट, चक्कर आना और दम घुटना शामिल है। सिम्स के एक्सपर्ट डॉक्टरो की माने तो मरीज को सर्पदंश के बाद रक्त का बहाव और विष का फैलाव धीमा करने के लिए रोगी को दिलासा देनी चाहिए। काटे हुए शरीर के अंग को स्थिर रखकर पट्टी का उपयोग करना चाहिए। काटे हुए छोर से अंगूठी, कंगन, जूते अथवा अन्य दबाव वाले वस्तु को निकालना चाहिए। पीड़ित व्यक्ति को लेटे हुए स्थिति में रखकर जल्द अस्पताल ले जाना चाहिए।

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