मल्हारमस्तूरी

सत्ता में किसान हितैषी सरकार फिर भी फसल कैसे लेंगे किसानों को खाए जा रही है चिंता

उदय सिंह

बरसात का मौसम दस्तक दे रहा है लेकिन इससे किसान खुश नहीं है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें लगातार गहराता ही जा रही है। प्रदेश में करीब 6 माह पहले बनी सरकार खुद को किसान हितेषी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ती । किसानों की हित की बात करके ही कांग्रेस सत्ता में आई लेकिन अब कांग्रेस की नीतियों और योजनाओं की वजह से प्रदेश का किसान निराश है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मल्हार के अंतर्गत आने वाले सेवा सहकारी समिति मल्हार सहित सात गांवों के करीब 700 किसानों को इस साल खरीफ फसल के लिए अब तक केसीसी नहीं मिल पाई है और ना ही खाद और बीज की कोई व्यवस्था अब तक हुई है। मानसून शुरू होते ही खेती किसानी का काम आरंभ हो जाएगा और इसके लिए किसानों को तत्काल बीज और खाद की आवश्यकता होगी। इससे विभाग के सभी अधिकारी परिचित है और किसानों ने भी बार-बार उन्हें इस बात के लिए ताकीद किया है , लेकिन फिर भी हालात ढाक के तीन पात नजर आ रहे हैं।

स्थानीय अधिकारी भले ही किसानों को आश्वासन दे रहे हो लेकिन इससे किसानों की चिंता दूर नहीं हो रही। जून का पहला पकवाड़ा खत्म होने को है और अब तक खाद बीज और केसीसी नहीं आई है। बरसात हो भी जाए तो भी किसानों को अपना खेत खाली रखना पड़ेगा क्योंकि उनके पास ना तो खाद है और ना ही बीज। मल्हार क्षेत्र के ही अलग-अलग गांव के किसान भेदभाव करने का आरोप लगा रहे हैं और अधिकारियों से जवाब देते नहीं बन रहा। मल्हार समिति के 768 किसानों में से 650 किसानों ने केसीसी के लिए आवेदन किया था लेकिन अब तक उन्हें वह नहीं मिली है। इसी क्षेत्र के ग्राम जुनवानी के किसानों का आरोप है कि उन्होंने खाद, बीज के लिए 2 महीने पहले ही आवेदन कर दिया था लेकिन कोई निराकरण नहीं हुआ है। जुनवानी के ही कृष्ण कुमार टंडन कहते हैं कि समिति द्वारा कहा जा रहा है कि सरकार सही पैसा नहीं आया है इसलिए हम कहां से दे। इस वर्ष यह किसान कैसे फसल लगाएंगे और क्या खाएंगे यही चिंताएं किसानों को अभी से परेशान कर रही है । मल्हार के किसान युगल साहू कहते हैं कि 3 माह पहले ही केसीसी के लिए आवेदन किया गया था परंतु अब तक कुछ भी हासिल नहीं हुआ और ना ही खाद और बीज की उपलब्धता हो पाई है। मल्हार परिक्षेत्र में आने वाले गांव में किसानों को केसीसी, खाद ,बीज नहीं मिलने से वे आक्रोशित हैं और आंदोलन की बात कह रहे हैं ।

हैरानी इस बात की है कि किसानों ने ही जिस सरकार को बनाया है वह खुद किसानों की परेशानी नहीं समझ रही है। इसलिए किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, लेकिन अगर किसानों ने फसल नहीं लगाई तो फिर वो क्या खाएंगे। यह भी योजना कारों को समझना होगा। सिर्फ कर्ज माफी के वायदे से किसानों का भला होने वाला नहीं है। किसानों के हित के लिए जमीन पर योजनाओं को अमल में लाना भी उतना ही जरुरी है।

error: Content is protected !!
Letest
बीमार छात्रा से कुर्सी साफ कराने पर मचा बवाल.. वायरल वीडियो ने खोली स्कूल की संवेदनहीनता, मस्तूरी के... सीपत नहर रोड पर बदमाशों का आतंक! पहले लूट की कोशिश, फिर सुनसान रास्ते में घेरकर चाकू से हमला, पीठ मे... शराब के लिए पैसे नहीं दिए तो बेकाबू हुआ युवक, मजदूर पर धारदार हथियार से हमला, कलाई-कोहनी और पीठ पर आ... फेसबुक लिंक से आया SBI YONO ऐप... डाउनलोड करने की कोशिश में उड़ गए 6 लाख, पुलिस की सतर्कता और समझाइश... छत्तीसगढ़ में कैंसर उपचार को मिली नई मजबूती, रायपुर में एक ही छत के नीचे जांच से उन्नत इलाज तक सुविध... देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट में फिर बड़ा हादसा... चौकसे कॉलेज के 3 छात्र हसदेव नदी में बहे, 1 की मिली ... सिम्स में दवा वितरण में अव्यवस्था से उपजा विवाद…आक्रोशित युवक ने किया हंगामा, वीडियो हो रहा वायरल, VIDEO कोटा :- बाघ के हमले से दवनपुर में दहशत,घमेला से भिड़ा ग्रामीण…खेत में खाद छिड़कते समय अचानक झप... सिम्स के 19 पीजी पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण को मिली अस्थायी मंजूरी...एमडी-एमएस की 91 सीटों पर प्रवेश की... सिम्स की पार्किंग में पेट्रोल चोरी करते पकड़े गए दो किशोर... गार्डों की सतर्कता से खुला मामला,