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मंदी की ओर बढ़ती अर्थव्यवस्था, बड़ी कंपनियों में होने लगी छटनी

डेस्क

टाटा की तीन कंपनियों टाटा मोटर्स, टाटा कमिंस और टाटा हिताची में छंटनी के आसार बढ़ गये है. मंदी के चलते तीनों कंपनियां कर्मचारी की संख्या में करीब 20 फीसदी तक की कमी कर सकती हैं. यानी करीब 12,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की आशंका तेज हो गयी है. बीते एक साल से देश का ऑटोमोबिल सेक्टर मंदी की मार से गुजर रहा है. ऐसे में कंपनी को हर तिमाही में नुकसान उठाना पड़ रहा है. ये भी खबरें हैं कि ज्यादातर छंटनियां मैनेजमेंट और अधिकारी स्तर के कर्मचारियों की होंगी. जिसके लिए उनका परफॉर्मेंस और उनकी उपयोगिता को देखा जायेगा. बीते दो महीने में तीनों कंपनियों ने दस दिन से ज्यादा का ब्लॉक क्लोजर किया है. सितंबर में भी ब्लॉक क्लोजर जारी रहेगा।कर्मचारियों में छंटनी का डर बढ़ गया है. जुलाई में टाटा मोटर्स की एचआर हेड कई अधिकारियों के साथ जमशेदपुर का दौरा कर चुकीं हैं. लगातार होते बलॉक क्लोजर के पीछे की वजह ये है कि कंपनी के पास उत्पादित माल का स्टॉक काफी बढ़ गया है. अब नये उत्पाद के रखने की जगह नहीं है. हालांकि कंपनियां इसके पीछे दलील दे रही हैं कि ये हर साल की प्रक्रिया है, जो बारिश के वक्त होती है. लेकिन फिर भी त्यौहारी सीजन की शुरुआत से पहले 10 से 15 दिनों का ब्लॉक क्लोजर कर्मचारियों को समझ नहीं आ रहा.टाटा मोटर्स को2019-20 के शुरुआती तीन महीने में करीब साढ़े तीन हजार करोड़ का घाटा हो चुका है. जबकि पिछले साल की समान अवधि में ये घाटा करीब 1900 करोड़ का था. कंपनी ने कहा है कि मंदी का दौर लंबा हो गया है और लगातार नुकसान बढ़ रहा है. लिहाजा कंपनी नये सिरे से मुनाफा बढ़ाने पर विचार कर रही है. इसके अलावा रियल एस्टेट में छायी मंदी से भारी वाहन निर्माता कंपनी टाटा हिताची परेशान है. मांग में जबरदस्त गिरावट से कंपनी के शेड में स्टॉक भर गया है, जिसके चलते टाटा हिताची बार-बार प्रोडक्शन रोक रही है.कंपनी के बड़े अधिकारी भले ही अभी किसी छंटनी की आशंका से इंकार कर रहे हैं और सभी वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं, लेकिन इतना तो साफ है की मंदी के गहराते बादल नवंबर 2019 तक नहीं छंटे तो कंपनियों को लागत घटाने के लिए भारी छंटनी का सहारा लेने को मजबूर होना पड़ेगा. मांग में गिरावाट का फेज एक साल से ज्यादा का हो चुका है और हर महीने मांग में कमी हो रही है. ऐसे में जरूरत से ज्यादा कर्मचारी कोई कंपनी नहीं झेल सकती. छंटनी की शुरुआत जापान की कार निर्मात कंपनी निशान ने कर दी है. निशान ने हाल ही में 10,000 कर्मचारियों की छंटनी का आदेश जारी कर दूसरी बड़ी कंपनियों को भी छंटनी जैसे विकल्प पर सोचने को मजबूर कर दिया है.

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