
उदय सिंह
बिलासपुर – छत्तीसगढ़ की सबसे हाई सिक्योरिटी मानी जाने वाली बिलासपुर सेंट्रल जेल में बुधवार शाम एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज घटना सामने आई। डबल मर्डर के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी ने जेल परिसर में स्थापित गैसीफायर प्लांट की गर्म भट्ठी में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद पूरे जेल परिसर में हड़कंप मच गया। जेल प्रशासन ने तत्काल सायरन बजाकर आपात स्थिति घोषित की और पुलिस सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी।

मृतक की पहचान राहुल उर्फ विकेश कंवर 46 वर्ष, पिता अमर सिंह कंवर, निवासी बम्हनीडीह, जिला जांजगीर-चांपा के रूप में हुई है। वह वर्ष 2014 से डबल मर्डर के मामले में सजायाफ्ता था और बिलासपुर सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। मिली जानकारी के अनुसार घटना बुधवार शाम लगभग 4:15 बजे की है। जेल परिसर में संचालित गैसीफायर प्लांट में लकड़ियों से गैस तैयार की जाती है, जिसका उपयोग जेल की रसोई में भोजन बनाने के लिए किया जाता है। प्रत्यक्ष जानकारी के मुताबिक प्लांट उस समय चालू था। इसी दौरान राहुल उर्फ विकेश कंवर अचानक गैसीफायर के पास पहुंचा और किसी को संभलने का मौका दिए बिना गर्म भट्ठी में छलांग लगा दी।

जिससे कुछ ही क्षणों में उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसएसपी रजनेश सिंह, पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने जेल प्रबंधन से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और जांच शुरू कर दी है। फिलहाल गैसीफायर मशीन अत्यधिक गर्म होने के कारण मृतक का शव बाहर नहीं निकाला जा सका है। अधिकारियों के अनुसार मशीन पूरी तरह ठंडी होने के बाद ही शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा।

इसके बाद ही मौत के संबंध में अन्य आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस घटना ने प्रदेश की सबसे सुरक्षित जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि एक सजायाफ्ता कैदी गैसीफायर जैसे अत्यंत संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्र तक कैसे पहुंच गया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के समय वहां कौन-कौन कर्मचारी तैनात थे, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं, तथा कहीं किसी स्तर पर लापरवाही तो नहीं बरती गई।
फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। आत्महत्या के कारणों, सुरक्षा में संभावित चूक और जेल प्रशासन की जिम्मेदारी तय करने के लिए पुलिस, एफएसएल और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त जांच जारी है। यह घटना छत्तीसगढ़ की जेल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।