
उदय सिंह
बिलासपुर – खरीफ सीजन के बीच बिलासपुर जिले के किसानों पर एक और बड़ी मार पड़ रही है। पहले मौसम की अनिश्चितता, बढ़ती खेती लागत और फसलों के घटते दाम ने किसानों की कमर तोड़ दी थी, अब खाद की कालाबाजारी ने उनकी मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। जिले के मस्तूरी, बिल्हा, तखतपुर, कोटा और रतनपुर क्षेत्र से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि निजी कृषि केंद्रों में किसानों को निर्धारित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के बजाय मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। कई किसानों का आरोप है कि उन्हें खाद के लिए तय कीमत से दो से तीन गुना तक राशि चुकानी पड़ रही है, जबकि कृषि विभाग इस पूरे मामले में मूकदर्शक बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही शिकायतों के अनुसार कई निजी खाद विक्रेता किसानों को निर्धारित मात्रा में खाद देने के बजाय अतिरिक्त कृषि सामग्री खरीदने की शर्त रखते हैं। कई जगहों पर बिना अतिरिक्त सामान खरीदे खाद देने से इनकार कर दिया जाता है, जबकि कहीं सीधे अधिक कीमत वसूली जाती है। खेती का समय निकल जाने और बोवनी प्रभावित होने के डर से किसान मजबूरी में अधिक कीमत चुकाकर खाद खरीद रहे हैं। विरोध करने पर उन्हें खाद नहीं मिलने का डर भी सताता है। किसानों का कहना है कि यह समस्या केवल मस्तूरी तक सीमित नहीं है। बिल्हा, तखतपुर, कोटा और रतनपुर क्षेत्र के अनेक गांवों में भी खाद की कमी और कालाबाजारी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसके बावजूद कृषि विभाग की ओर से न तो नियमित निरीक्षण किए जा रहे हैं और न ही दोषी विक्रेताओं के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे रही है। इससे किसानों में भारी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय-समय पर निजी कृषि केंद्रों में औचक निरीक्षण कर स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और बिलों की जांच की जाए तो पूरे खेल का खुलासा हो सकता है। उनका कहना है कि निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली करने वाले विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए जाएं और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो, ताकि किसानों का आर्थिक शोषण रोका जा सके। विशेषज्ञों का भी मानना है कि खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि इस समय किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर खाद नहीं मिलेगी तो फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा, जिसका प्रभाव पूरे कृषि क्षेत्र और बाजार पर देखने को मिलेगा। किसानों का दर्द यह भी है कि सरकार लगातार किसानों की आय दोगुनी करने, खेती को लाभकारी बनाने और कृषि विकास की बातें करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई देती है। खेत बचाने की जद्दोजहद में लगे किसान आज खुलेआम हो रही कालाबाजारी का शिकार बन रहे हैं। बढ़ती लागत और कर्ज के बोझ के बीच महंगी खाद खरीदना उनके लिए आर्थिक संकट को और गहरा कर रहा है।अब जिले के किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि मस्तूरी, बिल्हा, तखतपुर, कोटा और रतनपुर सहित पूरे बिलासपुर जिले में निजी खाद विक्रेताओं के यहां विशेष जांच अभियान चलाया जाए। यदि कहीं निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली, कृत्रिम कमी पैदा करने या अन्य अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस कालाबाजारी पर अंकुश नहीं लगाया गया तो खरीफ की पूरी फसल प्रभावित होगी और हजारों किसान आर्थिक संकट में और अधिक डूब जाएंगे। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह किसानों को राहत देता है या खाद माफिया का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।