
रमेश राजपूत
सुकमा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में चल रहे अभियान को सुकमा जिले में बड़ी सफलता मिली है। जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील पहल से मूसलाधार बारिश के बीच कवासीपारा, फूलबगड़ी गाँव में होने जा रहे दो बाल विवाह समय रहते रुकवा दिए गए। प्रशासन की इस पहल ने दो बालिकाओं के सुरक्षित और शिक्षित भविष्य का रास्ता खोल दिया। जानकारी के अनुसार चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर बाल विवाह की सूचना मिलते ही जिला महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम तत्काल गाँव के लिए रवाना हुई।

खराब मौसम और भारी बारिश के बावजूद टीम ने मौके पर पहुँचकर विवाह की तैयारियों को रुकवाया। गाँव में अधिकारियों ने स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए परिवारों से शांतिपूर्ण और संवेदनशील संवाद किया। इस दौरान उन्हें बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 की जानकारी देते हुए बताया गया कि कम उम्र में विवाह बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डालता है। प्रशासन की समझाइश का सकारात्मक असर हुआ और दोनों परिवारों ने बाल विवाह स्थगित करने का निर्णय लिया। दोनों बालिकाओं ने भी अपनी पढ़ाई जारी रखने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की इच्छा व्यक्त की। पूरी कार्रवाई को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए मौके पर पंचनामा और घोषणा-पत्र तैयार कराया गया, ताकि भविष्य में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह अभियान कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशन तथा जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी शिवदास नेताम और जिला बाल संरक्षण अधिकारी जितेंद्र सिंह बघेल के मार्गदर्शन में संचालित किया गया।

कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी (गैर संस्थागत देखरेख) मनीषा शर्मा, सेक्टर सुपरवाइजर रश्मि चन्द्रवंशी तथा सामाजिक कार्यकर्ता जोगेंद्र दिर्दो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।सुकमा की यह पहल साबित करती है कि समय पर मिली सूचना, प्रशासन की तत्परता और समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। यह कार्रवाई न केवल दो बालिकाओं का भविष्य सुरक्षित करने में सफल रही, बल्कि समाज को भी यह संदेश दिया कि शिक्षा और अधिकारों से समझौता किए बिना ही बच्चों का उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।