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देवरीखुर्द हाई स्कूल पहुंच मार्ग की हालत से नाराज अभिभावकों ने किया हंगामा, आंदोलन की दी चेतावनी

डेस्क

देवरीखुर्द शासकीय हाई स्कूल पहुंच मार्ग अब चलने लायक भी नहीं रह गया है लेकिन फिर भी रोजाना छात्र-छात्राओं को इसी मार्ग से होकर स्कूल जाना पड़ता है। जिससे नाराज अभिभावकों ने बुधवार को आयोजित शाला प्रवेश उत्सव का बहिष्कार कर दिया और सड़क की मरम्मत के लिए अल्टीमेटम भी दिया

देवरीखुर्द का दूसरा नाम ही समस्या बन चुका है । यहां सुविधाएं नाम मात्र को है लेकिन समस्याओं का अंबार लगा हुआ है । कुछ दिन पहले यहां के लोग पानी के लिए तरस रहे थे ,लेकिन पहली बारिश ने यहां आफत बरसा दी है। बारिश होते ही यहां स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राओं की मुसीबत कई गुनी बढ़ चुकी है । देवरीखुर्द शासकीय हाई स्कूल पहुंच मार्ग बेहद जर्जर है। चेकडैम मार्ग पर स्थित इस स्कूल तक पहुंचना जंग लड़ने के समान है। इस सड़क पर ईंट भट्टे की गाड़ियों की आवाजाही के चलते भी सड़क की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है ।

कच्ची सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन चुके हैं। हर तरफ कीचड़ और गड्ढों में पानी मौजूद है। जिससे होकर छात्र-छात्राओं को स्कूल जाना पड़ता है। स्कूल जाना जाने के दौरान कई तरह की समस्याओं से उन्हें दो-चार होना पड़ रहा है। किसी तरह जूते चप्पल हाथ में लेकर पैरों में मिट्टी कीचड़ लगी हालत में वे स्कूल तक पहुंच रहे हैं। इस दुर्दशा के बावजूद सुधार की कोई गुंजाइश यहां नजर नहीं आ रही, जिससे नाराज अभिभावकों और छात्र-छात्राओं ने बुधवार को आयोजित शाला प्रवेश उत्सव का बहिष्कार कर दिया। यहां घेराव करते हुए उन्होंने अपनी समस्याएं रखी।

देवरीखुर्द की सरपंच भारती परतें से भी इस संबंध में कई बार शिकायत की गई है और जिला प्रशासन को भी इससे अवगत कराया गया है ,लेकिन फिर भी इस सड़क की सूरत नहीं बदल पाई। बार-बार की शिकायतों के बाद भी कोई सुधार न होने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है ।

बुधवार को देवरीखुर्द शासकीय हाई स्कूल के छात्र-छात्राओं और अभिभावकों ने अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया। वही चेतावनी दी कि जल्द ही अगर यहां की जर्जर सड़क को सुधारा नहीं गया तो वे देवरीखुर्द मुख्य मार्ग पर चक्का जाम करेंगे। वैसे देखा जाए तो देवरीखुर्द के लोगों की यह बहुत पुरानी मांग है, जिसे ना जाने क्यों पूरा नहीं किया जा रहा। एक तरफ सरकार शिक्षा पर जोर दे रही है लेकिन दूसरी ओर शिक्षा को लेकर उसकी गंभीरता पर ऐसे नजारे प्रश्नचिन्ह लगाते हैं। लिहाजा इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। वैसे इस आंदोलन का कितना असर पंचायत और प्रशासन पर पड़ेगा, इस पर ही नतीजे निर्भर कर रहे हैं।

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