
हरिशंकर पांडेय

मल्हार – प्राचीन किले की सुरक्षा में लगे लोहे के एंगल को असामाजिक तत्व नुकसान पहुचाने के साथ चोरी करके भी ले जा रहे है। जिससे संरक्षित स्मारक के अस्तित्व की चिंता पुरातत्व प्रेमियों को हो रही है।
असुरक्षित है पूरा परिसर

भारतीय पुरातत्व विभाग ने इस प्राचीन किले को संरक्षित कर सुरक्षा के लिहाज से चारो तरफ बाउंड्रीवाल बनाकर लोहे का एंगल लगाया है जिसकी सुरक्षा के लिए कर्मचारी भी तैनात कर रखे है इन सबके बावजूद भी यहां लकड़ी व लोहे के एंगल चोरी की घटना हमेशा होती है। पर्याप्त कर्मचारी नही होने का फायदा असामाजिक तत्व हमेशा उठाते है। 10 वर्ष पूर्व यहां उत्खनन में प्राचीन महल का ढांचा सामने आया था इसके बाद यह स्थल महत्वपूर्ण हो गया है।

परन्तु स्मारक को बचाने व सुरक्षित रखने पुरातत्व विभाग गम्भीर नही है। संरक्षित स्मारक का ढांचा भी अब देख रेख के अभाव में क्षीण हो रहा है। साथ ही असामाजिक तत्व भी स्मारक व दीवाल को नुकसान पहुचा रहे है। वरिष्ठ नागरिक ओमप्रकाश पांडेय का कहना है कि भारी भरकम बजट वाले भारतीय पुरातत्व विभाग को किले की सुरक्षा के लिए 10 फिट का ऊंचा दीवार व लोहे के मजबूत एंगल लगाना चाहिए। इसके अलावा ज्यादा संख्या में सुरक्षा कर्मी भी रखना चाहिए। हरि सिंह ठाकुर का मानना है कि दो किले के बीच के रास्ते को बंद कर चारो तरफ मजबूत दीवाल बनाना चाहिए और चारो तरफ घीरे तालाब में बोटिंग की सुविधा बढ़ाना चाहिए जिससे प्राचीन किला सुरक्षित रहेगा साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
कई बार हो चुकी है चोरी…

20 जून की रात लोहे के 7 एंगल चोरी की घटना हुई थी इसी दिन सन्देह के आधार पर एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए पुलिस चौकी लाया गया गया था। इससे कुछ दिन पहले भी 25 नग एंगल की चोरी हुई थी जिसकी रिपोर्ट पुरातत्व विभाग के कर्मचारियों ने पुलिस चौकी में लिखाई थी जिसमे उन्होंने 33 नग लोहे की एंगल की कीमत 1 लाख 30 हजार बताई थी। इसी तरह इस जगह से कई बार लकड़ी चोरी की घटना भी हुई है।