
ऋतुराज बसंत के आगमन का पर्व है बसंत पंचमी। जिस तरह ऋतु का यह यौवन काल है वैसे ही नव योवनाओ के लिए भी यह विशेष अवसर है
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
बिलासपुर-रविवार को हर्षोल्लास के साथ बसंत पंचमी का पर्व मनाया गया। इस वर्ष यह पर्व सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग के साथ शुभ योग के संयोग में मनाया गया जिससे इसका महत्व कई गुना बढ़ गया। बसंत पंचमी की तिथि पर जहां स्कूलों में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की गई वही गायत्री मंदिर और घरों में भी देवी की आराधना आस्था के साथ की गयी। मां सरस्वती की पूजा के साथ ही हवन ,विद्या आरंभ और सांस्कृतिक धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। बसंत पंचमी विद्या और कला की देवी मां सरस्वती के पूजन का अवसर है। श्रद्धालु इस दिन विद्या आरंभ, नामकरण संस्कार भी संपन्न करते हैं। शहर के अधिकांश स्कूलों में मां सरस्वती की पूजा अर्चना की गई ,वहीं रेलवे परिक्षेत्र स्थित बंगाली स्कूल में बंगाल की प्राचीन परंपरा का अनुसरण करते हुए विधि विधान के साथ देवी का पूजन किया गया। इस अवसर पर यहां मेले जैसा नजारा रहा । विद्यार्थियों ने देवी की अर्चना कर विद्या का वर मांगा।
ऋतुराज बसंत के आगमन का पर्व है बसंत पंचमी। जिस तरह ऋतु का यह यौवन काल है वैसे ही नव योवनाओ के लिए भी यह विशेष अवसर है । नन्ही बालिकाएं इस दिन पारंपरिक रूप से साड़ी पहनती है। यह बसंत उत्सव का ही एक स्वरुप है। बंगाल से चली इस परंपरा के पालन में इस रविवार को बड़ी संख्या में छात्राएं साड़ी धारण कर स्कूल पहुंची और देवी आराधना के साथ यहां लगे मेले का आनंद लिया।
ब्रह्मा की मानस पुत्री देवी सरस्वती एक तरफ जहां विद्या की देवी है वही सभी कलाओं में महारत प्राप्त देवी सरस्वती को साहित्यकार कलाकार अपना आराध्य मानते हैं । सभी वर्गों द्वारा बसंत पंचमी पर देवी की आराधना की गई। वैसे शनिवार को भी कई स्थानों पर बसंत पंचमी का पर्व मनाया गया था । रविवार को सुबह के कुछ घंटों में ही शुभ मुहूर्त होने से पूजा अर्चना दोपहर से पहले संपन्न की गई। इस दिन गायत्री पीठों में भी हवन पूजन का आयोजन किया गया ।