
डेस्क
भारतीय जनता पार्टी हर 3 साल में सदस्यता अभियान चढ़ती है वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और इसके सदस्यों की संख्या सर्वाधिक है एक बार फिर 6 जुलाई से भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान की शुरुआत की गई है इस बार लक्ष्य पिछली मर्तबा से 20% अधिक सदस्य बनाने की है लिखित मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती महीने में ही मोदी समर्थकों का मोहभंग होता जा रहा है मोदी सरकार के भी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतियों के चलते पार्टी नहीं बगावत के सुर तेज हो रहे हैं इसलिए पार्टी के सदस्यता अभियान को वह रुझान नहीं मिल रहा जिसकी अपेक्षा की जा रही थी पार्टी के पुराने कार्यकर्ता ही पार्टी से किनारा करते दिख रहे हैं नए सदस्यों की जोड़ने की बात क्या कहे फिलहाल निष्ठावान कार्यकर्ता ही दोबारा पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं इस बार सदस्यता अभियान मोबाइल कॉल के जरिए पूरा किया जा रहा है बिलासपुर में भी 6 जुलाई को अभियान का आगाज किया गया था इसके बाद लगातार वार्डों में नए सदस्य जोड़ने की कोशिश की जा रही है
भारतीय जनता पार्टी का सदस्यता अभियान 8 जुलाई सोमवार को बिलासपुर जिले के प्रत्येक मंडलों में प्रारंभ हुआ। सभी 31 मंडलों के भाजपा कार्यकर्ता पदाधिकारी संयुक्त रूप से बूथ स्तर पर घर-घर पहुॅचकर लोगों को भाजपा की रीति-नीति सिद्धांतो से अवगत कराकर पार्टी का सदस्य बनाने की बात कही जा रही है।
भाजपा जिलाध्यक्ष रजनीश सिंह, जिला महामंत्री रामदेव कुमावत, घनश्याम कौशिक ने बताया कि पूरे देश में सदस्यता अभियान प्रारंभ हो चुका है जो 11 अगस्त तक ऑनलाईन चलेगा, जो भी भाजपा का सदस्यता ग्रहण करना चाहता है वह मोबाईल नम्बर 8980808080 निःशुल्क डायल सदस्य बन सकता है। इन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा इस अभियान पर पूरी नजर रखे हुए है, कोई भी युवा, पुरूष, महिला इस अभियान से वंचित न हो इस पार्टी के कार्यकर्ता इस अभियान में जुट गए है। पार्टी की निगाह इस बार मुसलमानों को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दिलाना है और इसी नीति की वजह से राष्ट्रवादी और राइट विंग के लोग पार्टी से किनारा कर रहे हैं । बड़ी संख्या में भाजपा समर्थकों का पार्टी से मोह भंग होता दिख रहा है और इसके नतीजे पार्टी को 11 अगस्त के बाद ही पता चलेंगे, जिसके बाद शायद पार्टी को अपनी नीति बदलने की जरूरत पड़े।