
भुवनेश्वर बंजारे

रायपुर – भारतीय संविधान के जानकारों की माने तो संसदीय सचिव का प्रावधान संविधान में नही है। जानकार बताते है कि इंग्लैंड की तीन स्तरीय व्यवस्था से यह पद परंपरा में आया है। जिसमें कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री और उपमंत्री जैसी व्यवस्था है। अपने यहां संसदीय सचिव की नियुक्ति मंत्रियों को उनके काम में मदद देने के लिए होती है। हालकि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में 11 संसदीय सचिव बनाए गए थे। जिसके बाद अब कॉंग्रेस सरकार ने 15 विधायको को संसदीय सचिव के लिए चुना है। जिनका शपथग्रहण समारोह मंगलवार शाम मुख्यमंत्री निवास में होना है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन 15 विधायकों को पद की शपथ दिलाएंगे।
मंंत्री के समतुल्य जानेे क्या है काम इनके..
संसदीय सचिव का यह पद संविधानिक नहीं राजनीतिक है। मुख्यत: मंत्रियों को उनके विभागीय कामकाज में मदद करते हैं। इनकी संविधानिक शपथ नहीं होती, इसलिए मंत्री की तरह सरकारी दस्तावेजों तक उनकी पहुंच नहीं होती। वे किसी फाइल पर हस्ताक्षर नहीं करते।
इन विधायकों को चुना गया..
1-रायपुर पश्चिम विधायक- विकास उपाध्याय 2-तखतपुर – रश्मि सिंह ठाकुर 3-जगदलपुर- रेख चंद जैन। 4-कांकेर- शिशुपाल सोरी 5-गुंडरदेही- कुंवर निषाद 6-बैकुंठपुर- अम्बिका सिंहदेव 7-सामरी- चिंतामणि महाराज। 8-भटगांव- पारस नाथ राजवाड़े। 9-कुनकुरी – यूडी मिंज। 10-खल्लारी – द्वारिकाधीश यादव। 11-महासमुंद – विनोद सेवनलाल चंद्राकर। 12-बिलाईगढ़ – चंद्रदेव प्रसाद राय। 13-कसडोल – शकुन्तला साहू। 14-नवागढ़ – गुरुदयाल बंजारे। 15-मोहला मानपुर – इंदरशाह मंडावी