
रमेश राजपूत
बिलासपुर- आरक्षण के मुद्दे पर सड़क पर उतरे महासंघ के सदस्यों की एड़ी चोटी लगाने के बाद भी बिलासपुर में बंद का असर बेसर ही रहा। महासंघ के कार्यकर्ताओं ने नेहरू चौक से रैली निकाल बिलासपुर व्यापारियों से दुकानों को बंद करने की अपील की। इसमें युवाओं के साथ-साथ सरकारी कर्मचारी भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे जो आरक्षण के मुद्दे पर आवाज बुलंद कर रहे थे।
क्या है वजह
मालूम हो छत्तीसगढ़ में पिछले 15 अगस्त को मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण में बढ़ोतरी करते हुए कुल आरक्षण 82% कर दिया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश है कि किसी भी प्रदेश में आरक्षण 50% से अधिक नहीं होगा इस मामले में भी हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के बाद यह आरक्षण लागू नहीं हो पाया। जिसको लेकर 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण के पक्ष में प्रदेश में बंद का आह्वान सर्व समाज महासंघ द्वारा किया गया।
बंद रहा बेअसर
ज्यादातर चौक चौराहों में बंद का आह्वान बेअसर साबित हुआ है। वहीं कुछ गिने-चुने जगहों में बंद का आंशिक असर देेेखने को मिला। जहाँ संगठन से जुड़े जनप्रतिनिधि पहुँच रहे थे वही केवल कुछ दुकाने बंद हुई बाकी क्षेत्रो में स्थिति सामान्य बनी रही। इस बार आरक्षण के समर्थन में लोग खुलकर सामने नहीं आए इसी वजह से यह बंद बेअसर साबित हुआ।
जनसंख्या के आधार पर आरक्षण की मांग
विभिन्न समाज प्रमुखों को इस आंदोलन का नेतृत्व सौंपा गया है। पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण प्रतिशत में बढ़ोत्तरी और इसके नए प्रावधान के कोर्ट से स्थगन हो जाने से आरक्षण की व्यवस्था प्रभावित हुई है। सर्वसमाज संगठन जातिगत जनसंख्या के आधार पर आरक्षण सुनिश्चित करने की मांग कर रहे है जो नियमों के विपरीत है, फ़िलहाल इस महाबंद के बेअसर होने के पीछे लोगों की मंशा साफ है, जिन्हें कोई समस्या नही है।