
रमेश राजपूत

बिलासपुर- जिले में लगातार खाद्य विभाग, मंडी और राजस्व अधिकारियों द्वारा अवैध धान की आवक पर रोक लगाने कार्रवाई की जा रही है। अब तक सभी ब्लॉक में कम से कम 5 प्रकरण तो बनाये ही गए है, और सैकड़ो क्विंटल धान के साथ वाहनों को जब्त किया गया है, लेकिन क्या यह कार्रवाई धान के अवैध कारोबारियों या बिचौलियों के ऊपर ही हुई है, यह बड़ा सवाल है क्योंकि इस कार्रवाई की जद में आने वाले कई किसानों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए जबरिया कार्रवाई का आरोप लगाया है। दरअसल किसानों ने बताया कि उन्हें पैसो की जरुरत है जिससे उन्हें घरेलू कार्रवाई के अलावा धान कटाई आदि के लिए भुगतान करना है, इसी वजह से उनके द्वारा पुराने धान को मिलरों या दुकानदारो के पास बेचने ले जाया जा रहा था, जिन्हें इस कार्रवाई के दौरान पकड़ लिया गया है, जबकि किसानों ने अपने धान के एवज में किसान पर्ची सहित अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किये गए है बावजूद 6-7 दिनों से उन्हें भटकाया जा रहा है। वही उन वाहनों को भी नही छोड़ा जा रहा है जिन्हें किसान किराये में लेकर धान परिवहन कर रहे थे, किसानों का दावा है कि उनके दस्तावेज़ो की जांच की जाए फिर कार्रवाई हो, यहाँ किसानों की मजबूरी को समझे बिना ही आंख मूंदकर कार्रवाई की जा रही है।
बाहरी धान पर हो कार्रवाई

किसानों ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि शासन बाहरी धान की आवक पर कार्रवाई करने तैनात है, लेकिन वो लोग तो यहाँ के ही किसान है फिर उन पर कार्रवाई क्यो की जा रही है। दूसरे प्रदेश या जिले से आने वाले धान को पकड़ना छोड़ यही के किसानो को प्रताड़ित किया जा रहा है।
नही हो रही सुनवाई

धान पकड़ने की इस कार्रवाई में पीड़ित किसानों ने अपने पक्ष में सारे दस्तावेज भी अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर दिए है बावजूद उनकी कोई सुनवाई नही हो रही है, बेहाल किसान रोजाना मुख्यालय, थाने और तहसील कार्यालय के चक्कर काटने मजबूर है।
शासन की मंशा को अधिकारी लगा रहे चूना

शासन की मंशा तो सही है कि किसानों की पूरी फसल सरकार ही खरीदें और उन्हें लाभान्वित करे जिसके लिए बाहरी धान की आवक पर रोक लगाने कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन कार्रवाई की आड़ में बेबस किसानों को चिन्हांकित करना और उन्हें राहत देना मौके पर मौजूद अधिकारी की जिम्मेदारी है, लेकिन वाहवाही लूटने की होड़ ने अधिकारियों को कुछ सुनने या देखने, समझने के लायक नही छोड़ा है, तभी लाचार किसान दर दर भटक रहे है।