मल्हार

इतिहास के पन्नो को समेटे खड़ा है मल्हार का पुरातन गढ़…पुरातत्व सरंक्षण की लग चुकी है मुहर, फिर भी राजनीतिक उदासीनता से कई वर्षों पिछड़ी है संवर्धन और संरक्षण की सीढ़ी

हरिशंकर पांडेय

मल्हार – प्राचीन गढ़ ( किला ) के उत्खनन के दौरान सामने आए हजारो वर्ष पुराने महल नुमा ढांचे को भी संभाल नही पा रहा है पुरातत्व विभाग। संरक्षित स्मारक घोषित होने के बाद भी देखरेख के अभाव में धरोहर का हो रहा भारी नुकसान। वही पातालेश्वर मंदिर परिसर में खुले आसमान में रखे हजारो प्राचीन प्रतिमाओं का भी क्षरण हो रहा है। विभाग के अधिकारियों का जिले के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल का उपेक्षा करना किसी के गले उतर नही रहा है। जबकि देश के प्रधानमंत्री विदेशों से वापस धरोहरों को लाने में लगे है। उल्लेखनीय है कि 13 वर्ष पूर्व 2010 में भारतीय पुरातत्व विभाग के उत्खनन शाखा क्रमांक 1 नागपुर द्वारा नगर के मध्य स्थित प्राचीन गढ़ के एक हिस्से की खुदाई का काम किया गया था। उत्खनन के दौरान भारी संख्या में प्राचीन अवशेष मिले थे।

जिसमें पुराने जमाने के मिट्टी से बने बर्तन, टेराकोटा की मूर्तियां, भोजन बनाने के काम आने वाले लोहे के सामान, मृदभांड, कृपाण आदि वस्तुओं के अलावा दो हजार वर्ष पुराने चावल के दाने भी मिले थे। जिसकी प्रदर्शनी कर विभाग लोगो के सामने रखा था। उत्खनन के दौरान सबसे महत्वपूर्ण महल नुमा ढांचा भी सामने आया था जिसका बारीकी से खुदाई कर पूरे ढांचे को सामने लाया गया था। जिसके सामने आने के बाद उत्खनन शाखा की टीम भी उत्साहित हुई थी कि यहां और अधिक स्थलों की खुदाई की जाए तो छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास की सटीक जानकारी मिल जाएगी। हालांकि इसके बाद खुदाई रोक दी गई और इस स्थल को संरक्षित कर आम लोगो के लिए खोल दिया गया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार उत्खनन के दौरान किले में पूर्व मौर्य काल, मौर्य काल, शुंग सातवाहन काल, गुप्त वाकाटक काल, और उत्तर गुप्तकाल के दौरान भी लगातार बसाहट के प्रमाण मिले है। साथ ही प्रस्तर और इंट से निर्मित संरचनात्मक अवशेष भी मिले जिनमे दो से अधिक कमरों के साक्ष्य पाए गए।

जिसमे सोपान व जल निकासी की संख्या महत्वपूर्ण है। उत्खनन के दौरान मिले प्राचीन अवशेषों को लेकर टीम वापस नागपुर चली गई, बताया जाता है कि मल्हार से मिले अवशेषों को नागपुर में ही रखा गया है। पुरातत्व के जानकार हरि सिंह का कहना है कि मल्हार में मिले धरोहर को मल्हार में ही रखने लोगो ने मांग की थी पर राजनीतिक उदासीनता के कारण हमारी धरोहर भी हांथ से निकल गई और अब इस स्मारक के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है जो धर्मनगरी, पुरातन नगरी के लिए अच्छे संकेत नही है। शेषनारायण गुप्ता का कहना है कि संरक्षित स्मारक हमारी धरोहर है और इनसे हमारी युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है, संरक्षित करने के बाद उपेक्षित करना मन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। पूर्व पर्यटन सदस्य सलाहकार अजय शर्मा का कहना है कि पुरातात्विक दृश्टिकोण से मल्हार बेहद समृद्ध है इसलिए पुरासम्पदा का संरक्षण जरूरी है नही तो संरक्षण के अभाव में इतिहास ही मिट जायेगा ये धरोहरे ऐतिहासिक अध्ययन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ओमप्रकाश पांडेय का कहना है कि राजनीतिक उदासीनता के कारण मल्हार अब तक उपेक्षित है। पिछले वर्ष बिलासपुर सांसद अरुण साव से मिलकर ध्यानाकृष्ट कराया गया था उम्मीद है कि वे इस गम्भीर मुद्दे पर संज्ञान लेंगे।

13 वर्षो में बदल गई स्थल की सूरत….

भारतीय पुरातत्व विभाग के अधीन नगर के दोनों गढ़ (किला) के उत्खनन के बाद चारो तरफ से दीवाल खड़ी कर सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित कर दिया गया और कर्मचारियों की नियुक्ति कर स्मारक की देखरेख में लगा दिया इस बीच खबर आई कि उत्खनन में मिले महल को धूप व पानी से बचाने शेड लगाया जाएगा जिससे उसकी वास्तविक स्वरूप बना रहे। परन्तु 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी शेड नही लग पाया जिससे यह स्मारक क्षरण होकर खराब होने लगा है साथ ही रखरखाव नही होने से कई जगह की मिट्टी धंस रही है जिससे स्मारक के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

असमाजिक तत्वों का डेरा है किला….

पुरातत्व विभाग ने भले ही गढ़ को संरक्षित कर दिया है परन्तु सुरक्षा की समुचित व्यवस्था नही होने से उत्पाती व असमाजिक तत्व गढ़ के अंदर आसानी से घुसकर नशाखोरी करते है। इसके अलावा बाउंड्रीवाल को भी क्षति पहुचाते है। एक वर्ष पूर्व दीवाल में लगे लोहे के एंगल को भी चोरों ने पार कर दिया जिसकी पुलिस में शिकायत भी हुई थी और इसकी शिकायत लोगो ने विभाग के अधिकारीयो से कई बार की है पर विभागीय अधिकारियों ने गम्भीरता नही दिखाई।

पुरातत्व विभाग के पास बजट की कमी…

मामले में जिला पुरातत्व अधिकारी हेमंत मीणा ने बताया कि “पिछले वित्तीय वर्ष में प्रपोजल भेजा गया था परन्तु बजट नही होने के कारण रिनोवेशन का काम नही हुए उम्मीद है इस बार कंजर्वेशन का काम होगा जिससे यह स्थल खूबसूरत हो जाएगा।”

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