
भुवनेश्वर बंजारे

बिलासपुर-संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सिम्स के जूनियर डॉक्टर गुरुवार को हड़ताल पर रहे। विगत आठ महीनों से स्कॉलरशिप नहीं मिलने की वजह से यह हड़ताल करने का निर्णय इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टरों ने लिया है। डीन कार्यालय का चक्कर काटते काटते थक चुके इन डॉक्टरों ने अपनी मांगों के लिए आंदोलन का रुख तैयार किया है इसी कड़ी में गुरुवार को जूनियर्स डॉक्टर हॉस्पिटल परिसर के सामने धरने पर बैठे, जहां उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की वहीं सरकार और विभागीय मंत्री टीएस सिंहदेव को भी आड़े हाथों लिया। डॉक्टरों का कहना है कि बिना पैसे के आखिर काम कैसे होगा…? जबकि प्रदेश सहित सिम्स अस्पताल में सभी लोगों के पैसे मिल रहे हैं, केवल जूनियर डॉक्टरों के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है..? गौरतलब है कि, जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से मरीज हलाक़ान हो रहे हैं। सिम्स हॉस्पिटल में पीजी सीट नहीं होने की वजह से सारा काम जूनियर डॉक्टर ही संभालते हैं । ऐसे में तकरीबन हर रोज दो हजार से ज्यादा मरीजों की ओपीडी वाले इस हॉस्पिटल में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । दूसरी तरफ सिम्स प्रबंधन और डीन के पास जूनियर डॉक्टर के समस्या का कोई समाधान ही नही है। वह केवल शासन को पत्र व्यवहार करने की बात कह रहे हैं।
दो घंटे के विरोध के बाद टूटा सिम्स प्रबंधन

गुरुवार को 8 महीनों से लंबित स्टाइपेंन राशि की मांग को लेकर सुबह से ही सिम्स हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर रहे, करीब 2 घंटे हड़ताल पर बैठे रहने के बाद डॉक्टरों के समक्ष डीन कार्यालय से सकारात्मक खबर आई। उन्होंने सभी जूनियर डॉक्टरों को 29 जनवरी तक 4 महीने कि लंबित राशि भुगतान करने का आश्वासन दिया है जिसके बाद सभी हड़ताली डॉक्टरों ने हड़ताल स्थगित कर अपने कार्य क्षेत्र में वापस लौट गए।
सिम्स के डॉक्टरों की डेढ़ करोड़ की राशि है लंबित

सिम्स हॉस्पिटल में करीब डेढ़ सौ जूनियर डॉक्टर विगत 8 महीनों से अपनी सेवा दे रहे हैं उनके एवज में उनको शासन से हर महीने 12605 रुपए छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है। लेकिन विभागीय लेटलतीफी के वजह से वर्तमान स्थिति में सिम्स के डेढ़ सौ जूनियर डॉक्टरों की करीब डेढ़ करोड़ रुपए की राशि भुगतान के लिए लंबित है।