
महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शंकर के साथ जुड़े होने से इसे परम शुभ कारी माना जाता है
बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा। इस वर्ष शिव जी को प्रिय सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग में शिवरात्रि का पर्व होने से इसे विशेष शुभ संजोग कारी और सकल मनोरथ पूर्ण करने वाला अवसर बताया जा रहा है ।महाशिवरात्रि की तैयारी अंचल के सभी शिवालयों में चल रही है । सोमवार सुबह से ही सभी शिवालयों में घंटे घड़ियाल की गूंज के साथ ओम नमः शिवाय का जाप सुनाई पड़ने लगेगा। महाशिवरात्रि मनाने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं । पौराणिक कथा अनुसार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव का जन्म हुआ था, वहीं इसी तिथि पर ही भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे । एक अन्य कथा अनुसार महाशिवरात्रि पर ही भोले भंडारी का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था । कुल मिलाकर महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शंकर के साथ जुड़ा होने से इसे परम शुभ कारी माना जाता है। और हिंदू मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाकर जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है । पंडित राम धर शास्त्री बताते हैं कि भगवान शिव को बेलपत्र ,शमीपत्र ,अष्टदल कमल, धतूरा, कनेर ,मदार ,नीलकमल आदि अर्पित करने से वे प्रसन्न होते हैं। इसके अलावा उन्हें धतूरा आक और बेल भी अर्पित किया जाता है। बिलासपुर और आसपास कई प्रसिद्ध शिव मंदिर है जहां महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा-अर्चना होगी और दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचेंगे ।वही हमेशा की तरह बिलासपुर के चांटीडीह में प्राचीन मेला भरेगा। यहां मेला पारा में चार धाम प्रतीकों के साथ स्थापित मंदिरों में भोले भंडारी की पूजा करने हजारों भक्तों पहुचेंगे। यहां लगने वाले मेले को लेकर भी खास आकर्षण हमेशा से रहा है । तमाम तरह के मनोरंजन के साधन झूले आदि तो लगते ही हैं साथ ही सात सौ के करीब छोटी बड़ी दुकानें लगती है ,जिसमें ग्रामीण जरूरतों के अलावा प्रसाधन सामग्री, मिठाई ,जेवर मनिहारी ,खिलौने, उखरा आदि उपलब्ध होता है ।आने वाला सोमवार भगवान शिव को समर्पित होगा। इस दिन भोले भंडारी की कृपा प्राप्त करने उनकी आराधना अवश्य करें। क्योंकि भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे देव हैं जो अल्प प्रयत्न से किए गए पूजा-अर्चना से भी प्रसन्न होकर पूर्ण फल प्रदान करते हैं।