
आहरण करने के दौरान अगर आसपास अनजाने लोग हैं तो भी सतर्क होने की जरूरत है

बिलासपुर प्रवीर भट्टाचार्य
पिछले कुछ दिनों से बिलासपुर की पुलिस हैरान परेशान थी। लगातार अजीब तरह की शिकायतें मिल रही थी। लोगों के पास एटीएम कार्ड मौजूद होता था और उनके बैंक अकाउंट से रकम निकाल ली जाती थी ।
और रकम निकाली भी जाती थी तो दूसरे प्रदेशों के टीएम से। पुलिस जानती थी कि आजकल एटीएम क्लोनिंग के माध्यम से ऐसा करना मुमकिन है, लेकिन इस मामले के तार अन्य राज्यों से जुड़े होने की वजह से पुलिस बेबस थी। तभी पुलिस को ख्याल आया कि कुछ दिनों पहले ऐसे ही मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी लेकिन उनका मास्टरमाइंड अब भी फरार था ,उन्हें लगा हो ना हो ठगी के मामले का तार भी उसी से जुड़ा है। जिसके बाद साइबर सेल की एक टीम गठित की गई और टीम उड़ीसा पहुंची, जहां सुंदरगढ़ के भसमा से ओबेद मेहर उर्फ केविन मूर्ति उर्फ राजू देव को पकड़ने में पुलिस को कामयाबी मिली। पकड़ा गया आरोपी डिप्लोमा धारी इंजीनियर है ,लेकिन उसने अपने हुनर का इस्तेमाल गलत दिशा में किया। हिरासत में लेकर जब उससे पूछताछ की गई तो उसने परत दर परत घटनाओं का खाका खोल कर रख दिया । ओबेद ने बताया कि पिछले साल उसकी मुलाकात सरबहाल निवासी श्रीमंत दास से हुई थी जिसे वह काफी समय से जानता था। बातचीत के दौरान उसने बताया कि बैंक से कैश क्रेडिट के तहत 30 से 40 लाख तक का लोन लेकर इसमें से 30 लाख रुपए बैंक में रखकर 10 लाख रुपए से कोई व्यवसाय करें और बाद में अपनी साख बढ़ाकर और रकम लेने के बाद खुद को डिफाल्टर घोषित कर किसी दूसरे शहर में चले जाए। उस वक्त चर्चा में रहे विजय माल्या से दोनों प्रभावित थे। जब दोनों के दिमाग में इसी तरह के अपराध कर मोटी रकम कमाने की योजना बन रही थी कि तभी जुलाई अगस्त 2018 में मुंबई में हुए एक एक्सिस बैंक के एटीएम क्लोनिंग कर रुपए निकालने वाले गिरोह को पकड़ने पर एटीएम क्लोन करने की विधि का वायरल वीडियो उनके पास पहुंचा। जिसे दोनों ने बार-बार देखा और इंटरनेट पर भी इसकी जानकारी खंगाली, और जानकारी हासिल करने के बाद चीन से ऑनलाइन एटीएम क्लोनिंग डिवाइस मंगाया ।इसके बाद दोनों शातिरो ने डिवाइस को परखने सबसे पहले खुद के एटीएम कार्ड का क्लोन तैयार किया और उसकी मदद से रुपए निकाल कर तसल्ली कर ली। इस मामले में सफलता हाथ लगने के बाद दोनों ने एटीएम कार्ड का क्लोन बड़े पैमाने पर बनाना शुरू कर दिया। नवंबर के महीने में झाड़सुगुड़ा से रायपुर पहुंच कर श्रीमंत दास, खिरोद, घनश्याम कर्मी और सुजीत के साथ ओबेद ने रायपुर में 25 से 26 एटीएम कार्ड का क्लोन तैयार किया और उसकी मदद से दूसरे के अकाउंट से बड़ी रकम निकाल ली। यह लोग दिसंबर के महीने में दुर्ग पहुंचे और वहां भी 60 से 70 कार्ड का क्लोन तैयार किया और यह कार्ड अपने दूसरे साथियों को दे दिया । दुर्ग के बाद यह लोग 5 दिसंबर 2018 से 7 दिसंबर 2018 तक बिलासपुर के होटल में रुके और यहां रेलवे क्षेत्र डेंटल कॉलेज के पास स्थित एटीएम मे क्लोनिंग डिवाइस लगाया। एक डिवाइस का प्लेट टूट जाने के कारण इन लोगों ने डिवाइस को बंधवा तालाब में फेंक दिया और मिले आंकड़ों की मदद से झारसुगड़ा जाकर एटीएम कार्ड का क्लोन तैयार कर लिया। बिलासपुर के एटीएम क्लोनिंग डिवाइस के सहारे प्राप्त एटीएम कार्ड के डाटा और पिन्होल वीडियो कैमरे की मदद से प्राप्त पासवर्ड नंबरों की मदद से इन लोगों ने दीघा बीच रुक कर 1 लाख 80 हज़ार रुपये निकाल लिए। इसी तरह हावड़ा स्टेशन के आसपास भी इन लोगों ने 2 लाख रुपए निकाले।
पकड़े गए शातिर अपराधियों के पास से पुलिस को 3 लैपटॉप ,हाथ घड़ी, 7 मोबाइल, जिओ वाईफाई सेट, दो पिन्होल कैमरा सेट, चार पैकेट स्किमर चिप, 64 हाई और लो क्वालिटी के क्लोन एटीएम कार्ड, सोने की चेन और अंगूठी, एक बोलेरो और एटीएम कार्ड राइटर मिला।
बिलासपुर में शातिर अपराधियों के तोरवा और कोतवाली थाना क्षेत्र में ही 7 मामले दर्ज थे इसलिए इनकी गिरफ्तारी बड़ी कामयाबी मानी जा रही है।
इसके पहले पुलिस श्रीमंत दास ,खिरोद पटेल, घनश्याम कर्मी, सुजीत खड़िया, धरनी सेन, पाउल मेहर, प्रवीण सोनबेर और अब्दुल हसीब को गिरफ्तार कर चुकी थी ।उन्हीं के माध्यम से मास्टरमाइंड तक पहुंचने में पुलिस को कामयाबी मिली। डिजिटल लेनदेन की प्रक्रिया को सुरक्षित बताया जाता है लेकिन नई तकनीक के साथ सी गैंग के लोग हर सुरक्षा का तोड़ निकाल लेते हैं। लोगों के पास एटीएम कार्ड होने के बावजूद उनके खातों से रकम निकाली जाती है, इसीलिए एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि किसी भी एटीएम में विड्रॉल करने से पहले अच्छी तरह मशीन की जांच परख कर ले कि जहां एटीएम कार्ड एंटर करना है वहां अलग से कोई डिवाइस तो नहीं लगी है ,साथ ही कोई अलग से कैमरा ना लगा हो। एटीएम का पासवर्ड एंटर करते समय भी हमेशा एक हाथ से छुपाकर नंबर डायल करना चाहिए ।अनजाने और खाली एटीएम से आहरण करने से बचना चाहिए । आहरण करने के दौरान अगर आसपास अनजाने लोग हैं तो भी सतर्क होने की जरूरत है। उम्मीद की जा सकती है कि मास्टरमाइंड के पकड़े जाने के बाद गिरोह के कारनामे कुछ समय के लिए थमे रहेंगे, लेकिन इतना तो जाहिर है यह सभी अपनी सजा काटकर बाहर आ जाएंगे और उसके बाद फिर से यही काम करने लगेंगे।